BJP का मिशन यूपी 2027ः : प्रभारी मंत्रियों के जिलों में हुआ व्यापक फेरबदल, इन्हें मिली बड़ी जिम्मेदारी, क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण साधने पर जोर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रभारी मंत्रियों के जिलों में व्यापक फेरबदल किया है। सरकार का उद्देश्य संगठन और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ विभिन्न जिलों में विकास योजनाओं की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना है। राजनीतिक जानकार इसे आगामी चुनावों के लिए भाजपा की रणनीतिक तैयारी का अहम हिस्सा मान रहे हैं।
भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडेय को मिली अहम जिम्मेदारी
नई सूची में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी को आगरा और कासगंज का प्रभारी बनाया गया है। वहीं खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडेय को सीतापुर जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद जारी इस नई व्यवस्था में कई वरिष्ठ मंत्रियों के प्रभार बदले गए हैं, जबकि नए मंत्रियों को भी महत्वपूर्ण जिलों की जिम्मेदारी दी गई है।
प्रमुख जिलों की कमान वरिष्ठ मंत्रियों को
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना को वाराणसी और लखनऊ, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही को अयोध्या और बस्ती तथा जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को प्रयागराज और गोरखपुर का प्रभारी बनाया गया है। महिला कल्याण मंत्री बेबी रानी मौर्य को इटावा और हाथरस, गन्ना विकास मंत्री लक्ष्मी नारायण चैधरी को अलीगढ़ और फिरोजाबाद तथा पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह को झांसी और फर्रुखाबाद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसके अलावा पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह को गाजियाबाद और रामपुर, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ को मिर्जापुर और चित्रकूट तथा नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा को जौनपुर और भदोही का प्रभारी बनाया गया है।
क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण साधने पर जोर
सरकार ने स्वतंत्र प्रभार और राज्य मंत्रियों को भी जिलों की जिम्मेदारी देकर जमीनी स्तर पर योजनाओं की समीक्षा और निगरानी की व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया है। असीम अरुण, जेपीएस राठौर, दयाशंकर सिंह और दिनेश प्रताप सिंह समेत कई राज्य मंत्रियों को अलग-अलग जिलों का प्रभार सौंपा गया है।
चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा फैसला
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फेरबदल केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी का हिस्सा है। भाजपा नेतृत्व क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक मजबूती को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों को नई जिम्मेदारियां दे रहा है, ताकि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और चुनावी जमीन को और मजबूत किया जा सके।
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