मीनाक्षी अब जनता की अदालत में लगाएंगी न्याय की गुहार : SC से राहत न मिलने पर भरी हुंकार, कांग्रेस नेत्री ईसी-रिटर्निंग अफसर पर लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को नामांकन निरस्त करने के लिए बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि मैं चुनाव प्रक्रिया में दखल नहीं दे सकता है। शीर्ष अदालत से राहत न मिलने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने हुंकार भरी है कि अब वह जनता की अदालत में जाएंगी और न्याय की मांग करेंगी।
मीनाक्षी नटराजन ने शुक्रवार को कहा कि “हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। लोकतंत्र में एक और अदालत होती है, जनता की अदालत। हम अपनी लड़ाई उनके पास ले जाएंगे। मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगी, क्योंकि ऐसा करना उचित नहीं होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब तक इस मामले पर कोई स्पष्ट फैसला नहीं दे पाया है। नटराजन ने कहा, “हमने चुनाव आयोग से संपर्क किया था, लेकिन 48 घंटे बीत जाने के बाद भी वह चुप है। उसकी यह चुप्पी अपने आप में बहुत कुछ कह रही है।”
चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर पर आरोप
कांग्रेस नेता ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग “पूरी तरह प्रभावित” दिखाई दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिटर्निंग ऑफिसर स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रहे थे और उनका व्यवहार जनता के सामने उजागर हो चुका है। मीनाक्षी नटराजन ने कहा, “हम राज्यों के खिलाफ नहीं लड़ रहे थे। हम चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठा रहे थे। यह मामला केवल मध्य प्रदेश राज्य का नहीं था, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा था।”
‘दो तरह के कानून’ का आरोप
नटराजन ने आगे कहा कि देश में “कार्पोरेट जगत के लोगों के लिए अलग और संवैधानिक मूल्यों के लिए लड़ने वालों के लिए अलग कानून” लागू होता दिख रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी के निर्णय के अनुसार आगे की कानूनी और राजनीतिक लड़ाई जारी रहेगी।
नामांकन क्यों हुआ रद्द?
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन इस आधार पर रद्द किया गया था कि उन्होंने अपने खिलाफ लंबित एक आपराधिक मामले की जानकारी नामांकन पत्र में नहीं दी थी। कांग्रेस का तर्क था कि उनके खिलाफ अभी तक औपचारिक रूप से आरोप तय नहीं हुए थे, इसलिए इसे नामांकन रद्द करने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि उसका फैसला भविष्य में हाई कोर्ट में दायर की जाने वाली किसी भी संभावित चुनाव याचिका को प्रभावित नहीं करेगा। कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में पक्ष रखा था।
दिल्ली में कांग्रेस का सत्याग्रह
फैसले के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने नई दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ सत्याग्रह भी किया। पार्टी का आरोप है कि पूरे मामले में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन निष्पक्ष तरीके से नहीं किया गया।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
