झारखंड की 17 वर्षीय तन्नू कुमारी ने उठाई आवाज, : भाई को प्राइवेट स्कूल और उसे क्यों नहीं?

नई दिल्ली | झारखंड की 17 वर्षीय तन्नू कुमारी ने लड़कियों के साथ होने वाले भेदभाव पर सवाल उठाकर एक अहम मुद्दे को सामने रखा है। तन्नू के मुताबिक, उनका भाई निजी स्कूल में पढ़ सकता था, लेकिन उन्हें वैसा ही अवसर नहीं दिया गया। इस भेदभाव ने उनके मन में सवाल खड़े किए कि जब शिक्षा का अधिकार सभी बच्चों के लिए है, तो लड़कियों के लिए अलग नियम क्यों बनाए जाते हैं?

सुरक्षा और परंपरा के नाम पर लड़कियों पर पाबंदियां
तन्नू ने महसूस किया कि समाज में लड़कियों की आजादी और शिक्षा को सीमित करने के लिए अक्सर सुरक्षा, परंपरा और जिम्मेदारी जैसे तर्क दिए जाते हैं। उन्होंने यूनिसेफ के साथ बातचीत में बताया कि उन्हें धीरे-धीरे समझ आया कि ये तर्क कई बार लड़कियों की सुरक्षा के बजाय उन्हें चुप रखने और उनके अवसर सीमित करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
कहानियों से मिली भेदभाव को समझने की प्रेरणा
तन्नू की कहानी यह भी बताती है कि किताबें और कहानियां बच्चों को सामाजिक रूढ़ियों पर सवाल उठाने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। यूनिसेफ के साथ साझा किए गए उनके अनुभव के मुताबिक, कहानियों ने उन्हें लैंगिक भेदभाव को पहचानने और उसके खिलाफ अपनी बात रखने का नजरिया दिया।

लड़कियों को समान अवसर देना जरूरी
तन्नू कुमारी की कहानी समाज के सामने एक बड़ा सवाल रखती है—क्या लड़कियों को भी लड़कों की तरह शिक्षा, स्वतंत्रता और आगे बढ़ने के समान अवसर मिल रहे हैं? उनकी आवाज इस बात पर जोर देती है कि सुरक्षा और परंपरा के नाम पर लड़कियों के सपनों को सीमित नहीं किया जाना चाहिए। शिक्षा में समानता और परिवार का सहयोग हर बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए जरूरी है।
पलक गीते
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