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शहडोल में सजा बास्केटबॉल का कुंभ : मैदान में उतरे 240 खिलाड़ी, सीएम मोहन बोले- गांवों में भी छिपी है बड़ी खेल प्रतिभा

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Sep 16, 2026
11:16 AM
मैदान में उतरे 240 खिलाड़ी, सीएम मोहन बोले- गांवों में भी छिपी है बड़ी खेल प्रतिभा

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश के जनजातीय अंचल यह साबित कर रहे हैं कि प्रतिभा केवल बड़े शहरों की मोहताज नहीं होती। शहडोल आज खेलों की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहा है। यहां का विचारपुर गांव फुटबॉल की नर्सरी और ‘मिनी ब्राजील’ के रूप में देश-दुनिया में पहचान बना चुका है। अब बास्केटबॉल सहित अन्य खेलों में भी जिले के युवा लगातार आगे बढ़ रहे हैं।

सीएम ने यह बात शहडोल में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित 70वीं शालेय राज्यस्तरीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता के शुभारंभ समारोह को वर्चुअली संबोधित करते हुए कही। प्रतियोगिता में प्रदेश के 10 संभागों से 17 वर्ष तक की आयु के कुल 240 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं।

‘शहडोल खेलों का उभरता सितारा’

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहडोल संभाग का बास्केटबॉल से पुराना और गौरवशाली रिश्ता रहा है। यहां के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। संसाधन सीमित होने के बावजूद खिलाड़ियों का उत्साह कभी कम नहीं हुआ। इसी जुनून का परिणाम है कि आज शहडोल में तीन बास्केटबॉल कोर्ट उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों में शहडोल की बास्केटबॉल टीम ने राज्य स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया है। राष्ट्रीय स्कूली प्रतियोगिताओं में भी यहां के खिलाड़ियों ने पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है।

गांव से राष्ट्रीय मंच तक पहुंच रही प्रतिभाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि विचारपुर जैसे आदिवासी अंचल से निकलकर खिलाड़ी प्रशिक्षण प्राप्त कर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रहे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि गांव और छोटे क्षेत्रों में भी प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। फुटबॉल के साथ क्रिकेट, एथलेटिक्स, कबड्डी, वॉलीबॉल और बास्केटबॉल जैसे खेलों में भी युवाओं की रुचि लगातार बढ़ रही है।

शहडोल ने ‘खेलो एमपी’ और ‘यूथ गेम्स’ जैसी राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भी मजबूत भागीदारी दर्ज कराई है। जिले से निकले कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है और वे नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

‘जीत से ज्यादा सीखने पर दें ध्यान’

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खिलाड़ियों से कहा कि मैदान में उतरना ही जीत की पहली सीढ़ी है। इसलिए केवल हार-जीत के बारे में सोचने के बजाय खेलने और सीखने की भावना को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि शालेय खेल प्रतियोगिताएं बच्चों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, अनुशासन और टीम भावना विकसित करने का सशक्त माध्यम हैं।

उन्होंने कहा कि खेल केवल शारीरिक क्षमता दिखाने का माध्यम नहीं है, बल्कि इससे बच्चों का आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और व्यक्तित्व भी मजबूत होता है। मैदान में बहाया गया पसीना आगे चलकर खिलाड़ी के साथ-साथ प्रदेश और देश का नाम रोशन करता है।

राष्ट्रीय प्रतियोगिता की मेजबानी भी कर चुका शहडोल

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023-24 में बेहतर प्रदर्शन के बाद वर्ष 2024-25 में शहडोल को राष्ट्रीय स्तर की बास्केटबॉल प्रतियोगिता की मेजबानी मिली थी। यह पूरे जिले के लिए गौरव की बात है।

कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने भी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. संजय गोयल सहित विभागीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रतियोगिता स्थल पर बड़ी संख्या में खिलाड़ी और खेलप्रेमी भी उपस्थित रहे।

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