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वोटर आईडी को सटीक बनाने पर जोर : एसआईआर के तीसरे चरण का ऐलान, 16 राज्य और तीन केन्द्र शासित प्रदेशों की तारीख आई सामने

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May 14, 2026
10:47 AM
एसआईआर के तीसरे चरण का ऐलान, 16 राज्य और तीन केन्द्र शासित प्रदेशों की तारीख आई सामने

नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने गुरुवार को देश के 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तीसरे चरण की शुरुआत की घोषणा की। इसमें दिल्ली भी कवर होगा जिसका फाइनल इलेक्टोरल रोल (अंतिम मतदाता सूची) 7 अक्टूबर 2026 को सामने आएगी। हालांकि, इस चरण में हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को शामिल नहीं किया गया है। इन क्षेत्रों का अलग कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा।

चुनाव आयोग के मुताबिक, तीसरे फेज में ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम, मणिपुर, दमन-दीव, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, तेलंगाना, पंजाब, कर्नाटक, मेघालय, महाराष्ट्र, झारखंड, दिल्ली, नागालैंड, त्रिपुरा में एसआईआर किया जाएगा। एसआईआर का तीसरा चरण पूरा होने के बाद, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर पूरा देश इसके दायरे में आ जाएगा।

सितंबर से दिसंबर के बीच होगा अंतिम सूची का प्रकाशन

चुनाव आयोग के मुताबिक, हिमपात वाले क्षेत्रों में मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में एसआईआर का कार्यक्रम बाद में तय किया जाएगा। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह चरणबद्ध अभियान देशभर में मतदाता सूची की गुणवत्ता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पूरा कार्यक्रम मई 2026 से शुरू होकर दिसंबर 2026 तक चलेगा और अलग-अलग राज्यों में अंतिम मतदाता सूची सितंबर से दिसंबर 2026 के बीच प्रकाशित की जाएगी।

घर-घर जाकर होगा व्यापक सत्यापन

एसआईआर के तीसरे चरण के तहत लगभग 3.94 लाख बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) देशभर में घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। इस दौरान करीब 36.73 करोड़ मतदाताओं की जानकारी की जांच की जाएगी। यह प्रक्रिया जनगणना से जुड़ी मौजूदा फील्ड मशीनरी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए तय की गई है, ताकि प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सके।

इस बड़े अभियान में राजनीतिक दलों की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। विभिन्न दलों द्वारा नामित लगभग 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) इस प्रक्रिया में बीएलओ के साथ सहयोग करेंगे, जिससे पारदर्शिता और निगरानी मजबूत हो सके।

पारदर्शिता और भागीदारी पर जोर

निर्वाचन आयोग ने इस पूरे अभियान को एक ‘सहभागी और पारदर्शी प्रक्रिया’ बताया है। आयोग ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे हर मतदान केंद्र पर बूथ लेवल एजेंट नियुक्त करें ताकि मतदाता सूची की जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और प्रभावी बनी रहे। आयोग का मानना है कि राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी से मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की त्रुटि को कम किया जा सकता है और वास्तविक मतदाताओं को सही प्रतिनिधित्व मिल सकता है।

चुनाव आयुक्त का संदेश

इस अवसर पर चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने देश के सभी मतदाताओं से अपील की कि वे एसआईआर प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें। उन्होंने कहा कि यह अभियान लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा, “एसआईआर का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में केवल पात्र नागरिकों के नाम शामिल हों और किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में न रहे। सभी मतदाता अपने गणना फॉर्म सही समय पर भरें और प्रक्रिया में सहयोग करें।”

पहले चरणों की उपलब्धियां

आयोग ने जानकारी दी कि पहले दो चरणों में 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर अभियान चलाया गया था। इन चरणों में लगभग 59 करोड़ मतदाता शामिल थे। इस दौरान 6.3 लाख से अधिक बीएलओ और 9.2 लाख बीएलए को तैनात किया गया था। इन प्रयासों के जरिए कई स्तरों पर मतदाता सूची की जांच की गई, जिसमें डुप्लीकेट नाम, स्थानांतरित मतदाता, मृत व्यक्तियों के नाम और अयोग्य प्रविष्टियों को हटाने पर विशेष ध्यान दिया गया।

त्रुटि-मुक्त मतदाता सूची

निर्वाचन आयोग का कहना है कि इस गहन पुनरीक्षण अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटि-मुक्त बनाना है। साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि हर पात्र नागरिक का नाम सूची में शामिल हो और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अपात्र प्रविष्टि न रहे। इस अभियान को भारतीय लोकतंत्र की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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