निर्मला सप्रे पर सख्त सुप्रीम कोर्ट : विधानसभा अध्यक्ष को दिया दो महीने का वक्त, सिंघार की याचिका पर हुई सुनवाई

भोपाल। बीना विधानसभा सीट से विधायक निर्मला सप्रे का दल-बदल मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए विधानसभा अध्यक्ष को दो महीने के भीतर अयोग्यता याचिका पर फैसला सुनाने का आदेश दिया है। अब सियासी दलों की नजर विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिक गई हैं।
बता दें कि निर्मला सप्रे की अयोग्यता का मामला जुलाई 2024 से विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित है। इस बीच मामले को लेकर हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट में भी कानूनी लड़ाई चली। वहीं बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाली अयोग्यता याचिकाओं का निपटारा तेजी से होना चाहिए। ऐसे मामलों को लंबे समय तक लंबित रखना उचित नहीं है।
सिंघार के वकील ने जल्द निर्णय कराने की मांग
याचिकाकर्ता उमंग सिंघार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने अदालत में पैरवी करते हुए जल्द निर्णय कराने की मांग की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष को दो महीने के भीतर अंतिम फैसला लेने का निर्देश दिया।
निर्मला के खिलाफ सिंघार ने दायर की थी अयोग्यता याचिका
गौरतलब है कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने निर्मला सप्रे के खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता याचिका दायर की थी। आरोप है कि निर्मला सप्रे वर्ष 2023 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बनी थीं, लेकिन बाद में उन्होंने भाजपा के समर्थन में राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लिया और उसके पक्ष में प्रचार भी किया। कांग्रेस का कहना है कि पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद भाजपा के साथ जाने का उनका कदम संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता का आधार बनता है।
प्रफुल्ल तिवारी
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