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Bank Cash Deposit Rules : बैंक में कैश जमा करने से पहले जान लें ये नियम, वरना इनकम टैक्स के सवालों का करना पड़ सकता है सामना

नीरज द्विवेदी

नीरज द्विवेदी

Sep 12, 2026
06:32 AM
बैंक में कैश जमा करने से पहले जान लें ये नियम, वरना इनकम टैक्स के सवालों का करना पड़ सकता है सामना

Bank Cash Deposit Rules: अगर आपके पास वैध और घोषित पैसा है और आप उसे बैंक अकाउंट में जमा करना चाहते हैं, तो सिर्फ बड़ी रकम जमा करने से अपने आप इनकम टैक्स नहीं लगता। हालांकि, वित्त वर्ष के दौरान तय सीमा से अधिक कैश डिपॉजिट होने पर बैंक को इसकी जानकारी आयकर विभाग को रिपोर्ट करनी पड़ सकती है।

ऐसे में अगर आप बैंक खाते में बड़ी मात्रा में नकद पैसा जमा करते हैं, तो उसके स्रोत और उससे जुड़े दस्तावेजों का रिकॉर्ड रखना बेहद जरूरी है। रकम का स्रोत स्पष्ट न होने पर आयकर विभाग की ओर से सवाल पूछे जा सकते हैं।

आइए जानते हैं बैंक में कैश जमा करने से जुड़े जरूरी नियम।

सेविंग अकाउंट में 10 लाख रुपये की कैश जमा

सेविंग अकाउंट में एक वित्त वर्ष के दौरान कुल 10 लाख रुपये या उससे अधिक कैश जमा होने पर बैंक को इसकी जानकारी आयकर विभाग को रिपोर्ट करनी पड़ सकती है। यहां यह समझना जरूरी है कि यह रिपोर्टिंग की सीमा है, सीधे टैक्स लगने की सीमा नहीं। यानी 10 लाख रुपये से ज्यादा कैश जमा करने का मतलब यह नहीं है कि उस पूरी रकम पर तुरंत टैक्स लग जाएगा।

10 लाख रुपये जमा करने पर तुरंत नहीं लगता टैक्स

मान लीजिए आपने एक वित्त वर्ष में बैंक खाते में 10 लाख रुपये या उससे अधिक नकद जमा किए हैं। सिर्फ इस वजह से आप पर तुरंत टैक्स की देनदारी तय नहीं हो जाती।

अगर आपके पास रकम के वैध स्रोत का रिकॉर्ड मौजूद है, जैसे घोषित आय, पुरानी बचत, संपत्ति की बिक्री या किसी अन्य वैध स्रोत, तो जरूरत पड़ने पर आप उस रकम के स्रोत को दस्तावेजों के जरिए समझा सकते हैं।

इसलिए बड़ी रकम कैश में जमा करते समय उसके स्रोत से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है।

करंट अकाउंट में 50 लाख रुपये का नियम

करंट अकाउंट के लिए कैश जमा और निकासी से जुड़ी रिपोर्टिंग सीमा अलग है। एक या एक से अधिक करंट अकाउंट में वित्त वर्ष के दौरान कुल 50 लाख रुपये या उससे अधिक कैश जमा या निकासी होने पर बैंक को इसकी जानकारी रिपोर्ट करनी पड़ सकती है।

इसलिए सेविंग अकाउंट और करंट अकाउंट के कैश ट्रांजैक्शन से जुड़े नियमों को एक जैसा नहीं समझना चाहिए।

अगर खाते में पहले से 10 या 12 लाख रुपये पड़े हैं तो?

यह बात भी समझना जरूरी है कि बैंक खाते में सिर्फ बड़ी रकम पड़ी होने और वित्त वर्ष के दौरान बड़ी मात्रा में कैश जमा करने में अंतर है।

उदाहरण के तौर पर, अगर आपके सेविंग अकाउंट में पहले से 12 लाख रुपये जमा हैं और उस वित्त वर्ष में आपने 10 लाख रुपये या उससे अधिक का कोई बड़ा कैश डिपॉजिट नहीं किया है, तो केवल खाते में 12 लाख रुपये बैलेंस होने से 10 लाख रुपये वाली कैश डिपॉजिट रिपोर्टिंग सीमा अपने आप लागू नहीं हो जाती।

पैसे के स्रोत का रिकॉर्ड रखना बेहद जरूरी

अगर आप बैंक में बड़ी रकम नकद जमा करने जा रहे हैं, तो उसके स्रोत से जुड़े दस्तावेज जरूर संभालकर रखें। उदाहरण के लिए पैसा वेतन, कारोबार, पुरानी बचत, संपत्ति की बिक्री, उपहार या किसी अन्य वैध स्रोत से प्राप्त हुआ है, तो उससे जुड़े कागजात सुरक्षित रखें।

जरूरत पड़ने पर यही दस्तावेज आयकर विभाग या अन्य संबंधित प्राधिकरण के सामने रकम के स्रोत को स्पष्ट करने में मदद कर सकते हैं।

कैश जमा करते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • बड़ी रकम जमा करने पर उसके स्रोत का रिकॉर्ड रखें।

  • कैश लेनदेन और आय के बीच उचित रिकॉर्ड बनाए रखें।

  • संपत्ति की बिक्री या उपहार से मिली रकम के संबंधित दस्तावेज संभालकर रखें।

  • बैंक की रिपोर्टिंग सीमा को सीधे टैक्स लगने की सीमा न समझें।

  • अपने आयकर रिटर्न में आय और वित्तीय लेनदेन की सही जानकारी देना सुनिश्चित करें।

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नीरज द्विवेदी
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नीरज द्विवेदी

5 साल से ज्यादा का पत्रकारिता अनुभव। टीवी और प्रिंट मीडिया में कलमकारी की है। पॉलिटिकल और पब्लिक कनेक्ट की खबरों में दिलचल्पी। TV27NEWS DIGITAL में एंकरिंग भी कर रहे हैं।

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