सीएम ने की संस्कृति विभाग की गहन समीक्षा, : परंपराओं को जोड़कर भव्य सांस्कृतिक पुनर्जागरण का किया आह्वान, विक्रमादित्य के नाम से बनेगी अकादमी

भोपाल। संस्कृति विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक परंपराओं और लोककला के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर व्यापक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की संस्कृति, कला और पुरातात्त्विक धरोहरें केवल पहचान नहीं बल्कि राज्य की अमूल्य संपत्ति हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगामी छह-सात महीनों में बड़े धार्मिक, सांस्कृतिक पर्व और मेले व्यापक स्तर पर आयोजित किए जाएं, जिनमें सभी समाजों और परंपराओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो।
परंपराओं को जोड़ने पर विशेष जोर
डॉ. यादव ने कहा कि संस्कृति विभाग ऐसे आयोजनों की श्रृंखला तैयार करे, जिससे विभिन्न समाज, उनकी आस्थाएं और परंपराएं एक साझा मंच पर आएं। उन्होंने विशेष रूप से आल्हा-ऊदल वीर रस गायन पर आधारित स्मृति उत्सव आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि लोकगाथाओं की परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके। इसके साथ ही श्रावण महोत्सव और भुजरिया पर्व को भी बड़े स्तर पर मनाने की बात कही गई।
नागपंचमी पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि नागपंचमी जैसे पर्वों को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इन्हें जैव विविधता संरक्षण से जोड़ा जाए। उन्होंने सर्प प्रजातियों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का संदेश जन-जन तक पहुंचाने पर बल दिया।
कला पंचांग का विमोचन और नई योजनाएं
बैठक में मुख्यमंत्री ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए तैयार ‘कला पंचांग’ का विमोचन भी किया। इसमें पूरे वर्ष होने वाली सांस्कृतिक गतिविधियों का विस्तृत कैलेंडर शामिल है, जिसे चरणबद्ध रूप से लागू किया जाएगा। उन्होंने विभाग की पुनर्संरचना और आधुनिक तकनीक के उपयोग के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों के विस्तार पर भी जोर दिया।
धार्मिक पर्यटन और ऐतिहासिक परियोजनाएं
मुख्यमंत्री ने श्रीराम वन गमन पथ और श्रीकृष्ण पाथेय परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन विकास की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा, प्रदेश के ज्योतिर्लिंगों और शक्ति पीठों को मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में शामिल करने पर भी विचार करने को कहा गया।
विक्रमादित्य अकादमी और किलों का विकास
डॉ. यादव ने सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर एक अलग अकादमी स्थापित करने की घोषणा की, जिसमें उनके जीवन और कार्यों पर शोध होगा। उन्होंने भोपाल के पास जगदीशपुर किले के ऐतिहासिक महत्व को पुनर्जीवित करने और भविष्य में यहां कैबिनेट बैठक आयोजित करने की योजना का उल्लेख किया।
कलाकारों और सांस्कृतिक प्रतिभाओं को प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के उन कलाकारों, गायकों और प्रतिभाओं की पहचान करने के निर्देश दिए जो मध्यप्रदेश से निकलकर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हुए हैं। उन्हें राज्य में प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया जाएगा ताकि नई पीढ़ी प्रेरित हो सके। उन्होंने पद्म पुरस्कारों के लिए राज्य की ओर से मजबूत अनुशंसा प्रणाली विकसित करने और पद्म पुरस्कार विजेताओं के लिए आर्थिक सहायता योजना बनाने पर भी जोर दिया।
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