जंगल से निकले 11 गजराज : कोरबा के गांव में आधी रात मचाया तांडव, किसानों की फसलें और संपत्ति की तबाह

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक बार फिर हाथियों की दस्तक ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। कटघोरा वनमंडल के जड़गा रेंज अंतर्गत बासीन सेक्टर के खाड़ीपारा इलाके में 11 हाथियों के दल ने देर रात जमकर उत्पात मचाया। अचानक गांव के समीप पहुंचे हाथियों के झुंड ने खेतों में खड़ी फसलों को रौंद डाला और किसानों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर इलाके में दहशत फैला दी।
ग्रामीणों के मुताबिक हाथियों का दल जंगल से निकलकर सीधे खेती वाले क्षेत्र में पहुंच गया। झुंड ने धान, मक्का और सब्जियों की फसलों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया। कई एकड़ में फैली फसल कुछ ही देर में बर्बाद हो गई। इतना ही नहीं, दो किसानों के खेतों में रखे कृषि उपकरण और अन्य सामान भी हाथियों के पैरों तले चकनाचूर हो गए।
अधिकारियों ने किसानों से चर्चा कर नुकसान का किया आकलन
घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने किसानों से चर्चा कर नुकसान का आकलन शुरू किया। वन विभाग का कहना है कि प्रभावित किसानों को शासन की नियमानुसार मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया तत्काल शुरू कर दी गई है। सर्वे रिपोर्ट तैयार होने के बाद जल्द ही सहायता राशि जारी की जाएगी।

जड़गा रेंज में मौजूद हैं करीब 45 हाथी
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार जड़गा रेंज में इस समय अलग-अलग समूहों में करीब 45 हाथी मौजूद हैं। इनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। हाथियों की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए आसपास के गांवों में अलर्ट जारी किया गया है। ग्रामीणों को विशेष रूप से रात के समय सतर्क रहने और अकेले खेतों की ओर नहीं जाने की सलाह दी गई है।
पानी की तलाश में जंगल से बाहर निकलते हैं हाथी
रेंज अधिकारियों का कहना है कि भोजन और पानी की तलाश में हाथी अक्सर जंगल से बाहर निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। जंगलों में संसाधनों की कमी और बदलते पर्यावरणीय हालात के कारण मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
वनांचल क्षेत्रों में हाथियों का उत्पात नई बात नहीं
गौरतलब है कि कोरबा जिले के वनांचल क्षेत्रों में हाथियों का आतंक कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ महीनों में कई गांवों में फसलों और मकानों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। लगातार हो रहे नुकसान से किसानों में नाराजगी बढ़ रही है और वे वन विभाग से हाथियों की रोकथाम के लिए स्थायी एवं प्रभावी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
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