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तकनीक और पशुपालन से बदलेगी खेती की तस्वीर : CM बोले- खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने नवाचार अपनाएं किसान, कृषि उद्योग में रोजगार की अपार संभावनाएं

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Aug 20, 2026
12:29 PM
CM बोले- खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने नवाचार अपनाएं किसान, कृषि उद्योग में रोजगार की अपार संभावनाएं

भोपाल। मध्यप्रदेश में खेती को अधिक लाभकारी और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पारंपरिक कृषि के साथ आधुनिक तकनीक, फसल विविधीकरण, उद्यानिकी, पशुपालन और मछली पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बदलती कृषि तकनीक और नवाचार ने किसानों के लिए समृद्धि के नए रास्ते खोले हैं। आने वाले समय में कृषि आधारित उद्योग ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के साथ आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा करेंगे। मुख्यमंत्री अशोकनगर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को समत्व भवन से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे।

एक ही फसल पर निर्भरता छोड़ आय के नए साधन अपनाने की अपील

मुख्यमंत्री ने किसानों से खेती के पुराने तौर-तरीकों के साथ नई संभावनाओं को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसान फसल उत्पादन के साथ उद्यानिकी, दुग्ध उत्पादन और मछली पालन को अपनी आय का हिस्सा बनाएं। इससे खेती पर निर्भर परिवारों के पास आमदनी के कई स्रोत तैयार होंगे और मौसम अथवा बाजार की चुनौतियों का असर भी कम किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उससे जुड़े उद्योग और प्रसंस्करण गतिविधियों को गांवों तक ले जाना जरूरी है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

शरबती गेहूं ने दिलाई अशोकनगर को अलग पहचान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अशोकनगर के किसानों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि जिले के अन्नदाता अपनी मेहनत और नवाचार से प्रदेश के अन्य किसानों के लिए उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अशोकनगर की चंदेरी साड़ी ने प्रदेश को वैश्विक पहचान दिलाई है, वहीं जिले का शरबती गेहूं अपने स्वाद और गुणवत्ता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जिले के किसान धनिया, गुलाब सहित विभिन्न उद्यानिकी फसलों की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे खेती में विविधता आने के साथ किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

कम बारिश में तकनीक बनी किसानों की ताकत

अशोकनगर के किसानों द्वारा कम बारिश की चुनौती के बीच अपनाई गई नई कृषि तकनीकों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले में डीआरएस तकनीक के जरिए धान की रोपाई का क्षेत्र बढ़ाया गया है। किसानों ने विपरीत परिस्थितियों को अवसर में बदलने का काम किया है। फसल विविधीकरण के कारण जिले में चना और मसूर का रकबा भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए किसानों को ऐसी फसलों और तकनीकों का चयन करना होगा, जिनसे कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ हासिल किया जा सके।

जवान और किसान दोनों देश की रीढ़

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान, महिला, गरीब और युवा राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में हैं। उन्होंने किसान की भूमिका को सीमा पर तैनात जवान के समान बताते हुए कहा कि जवान देश की सीमाओं की रक्षा करता है, जबकि किसान खेतों में मेहनत कर देशवासियों के लिए अन्न उपलब्ध कराता है। दोनों का योगदान राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में सरकार संवेदनशीलता और सक्रियता के साथ काम कर रही है। इसी भावना के साथ पूरे वर्ष को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है।

दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। उन्होंने किसानों से पशुपालन को खेती का पूरक व्यवसाय बनाने की अपील की। उनका कहना था कि खेती के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन को जोड़ने से ग्रामीण परिवारों की आय में स्थायित्व आ सकता है।

अगली पीढ़ी को बेहतर भविष्य देने का संकल्प

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान परिवारों की आने वाली पीढ़ी को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित भविष्य उपलब्ध कराना भी सरकार की प्राथमिकता है। सांदीपनि विद्यालयों के साथ प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों के बच्चों को बेहतर अवसर मिलेंगे तो ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभा और रोजगार दोनों का विस्तार होगा।

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