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पंजाब में फिर बन रही सियासी जोड़ी! : भाजपा-अकाली दल गठबंधन के संकेत से गरमाई राजनीति, 2020 में टूटा था ढाई दशक पुराना रिश्ता

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Aug 20, 2026
12:25 PM
भाजपा-अकाली दल गठबंधन के संकेत से गरमाई राजनीति, 2020 में टूटा था ढाई दशक पुराना रिश्ता

चंडीगढ़। पंजाब में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के बीच सियासी दूरियां कम होने के संकेत मिलने लगे हैं। अकाली दल की वरिष्ठ नेता एवं सांसद हरसिमरत कौर बादल ने संगरूर में एक जनसभा के दौरान ऐसा बयान दिया, जिससे दोनों दलों के दोबारा साथ आने की चर्चाओं को नई हवा मिल गई है। उन्होंने गठबंधन को लेकर सीधे तौर पर कुछ कहने से बचते हुए कहा कि राजनीतिक समझौते होते रहते हैं और जल्द ही लोगों को खुद पता चल जाएगा कि आगे क्या होने वाला है।

विकास के नाम पर दिए गठबंधन के संकेत

संगरूर में आयोजित जनसभा में हरसिमरत कौर बादल ने क्षेत्र में स्किल यूनिवर्सिटी की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह तो छोटे-छोटे काम हैं और गुरु साहिब की कृपा से पंजाब में फिर विकास और तरक्की की मजबूत नींव रखी जानी चाहिए। उन्होंने संकेतों में कहा कि दिल्ली से जिस तरह पहले पंजाब के विकास के काम होते थे, उसी तरह दोबारा विकास की राह मजबूत होनी चाहिए। उनके इस बयान को भाजपा के साथ संभावित राजनीतिक समझौते से जोड़कर देखा जा रहा है।

मोदी से मुलाकात के बाद बढ़ी चर्चाएं

हरसिमरत कौर का बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली में मुलाकात की थी। इसके बाद अकाली दल ने संसद के मानसून सत्र में केंद्र सरकार के विधेयकों को समर्थन देने की घोषणा की। इस घटनाक्रम के बाद पंजाब की राजनीति में भाजपा और अकाली दल के संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

2020 में टूटा था ढाई दशक पुराना रिश्ता

भाजपा और अकाली दल का करीब ढाई दशक पुराना गठबंधन वर्ष 2020 में तीन कृषि कानूनों के मुद्दे पर टूट गया था। इसके बाद दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़े। हालांकि, दोनों के बीच राजनीतिक रिश्तों का इतिहास इससे कहीं पुराना है। अकाली दल और जनसंघ के बीच राजनीतिक संपर्क 1952 के पहले आम चुनाव से ही दिखाई देता है। कांग्रेस के विरोध ने कई बार दोनों दलों को करीब लाने का काम किया, हालांकि भाषा, धार्मिक और संवैधानिक मुद्दों पर मतभेद भी सामने आते रहे।

1996 में मजबूत हुई थी दोस्ती

वर्ष 1996 में अकाली दल और भाजपा ने ऐतिहासिक गठबंधन किया था। इसके बाद दोनों दलों ने कई विधानसभा और लोकसभा चुनाव मिलकर लड़े तथा पंजाब में सरकार भी बनाई। लंबे समय तक यह गठबंधन राज्य की राजनीति में मजबूत राजनीतिक समीकरण माना जाता रहा।

अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच फिर बढ़ती नजदीकियों ने पंजाब की सियासत में नई संभावनाओं को जन्म दे दिया है। हालांकि गठबंधन पर अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन हरसिमरत कौर बादल के संकेत और सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को जरूर गर्म कर दिया है।

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