जाम से मिलेगी मुक्ति : राजधानी का पहला 650 मीटर ऊंचा थ्री-लेयर डबल-डेकर फ्लाईओवर का निर्माण शुरू, ऊपर से गुजरेगी मेट्रो लाइन

भोपाल। राजधानी भोपाल के सबसे बड़े और व्यस्त प्रभात चैराहे पर 48 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश का पहला थ्री-लेयर डबल-डेकर फ्लॉयओवर का निर्माण शुरू हो गया है, जो 650 मीटर लंबा होगा। इसमें नीचे सामान्य रोड, उसके उपर फ्लायओवर और उससे उपर मेट्रो लाइन चलेगी। इस फ्लायओवर के बनने से अशोका गार्डन और भोपाल स्टेशन तरफ जाने वाले ट्रैफिक के लिए सुगम मार्ग और जाम की समस्या का समाधान हो जाएगा। पीडब्ल्यूडी ने इस फ्लायओवर ब्रिज के निर्माण का लक्ष्य 18 से 24 माह रखा गया है। इस ब्रिज पर लगभग 73 करोड़ रुप की लागत आने की संभावना है। वैसे स्वीकृति 46 करोड़ की मिल चुकी है।
मिली जानकारी के अनुसार पीडब्ल्यूडी इस ब्रिज का निर्माण कर रही है। अभी यहां चारों दिशाओं में भारी ट्रैफिक के कारण हर थोड़ी देर में जाम लग जाता है। प्रभात चैराहा राजधानी के अन्य रोशनपुरा, बोर्ड आफिस आदि चैराहों से भी बड़ा और चैड़ा है। यहां से भोपाल स्टेशन प्लेटफार्म एक, पुराने शहर के नादरा बस स्टैंड, बोगदा पुल, रायसेन रोड और सुभाष नगर फ्लॉयओवर का रास्ता निकलता है। 24 घंटे में यहां से लगभग 10 हजार वाहनों की आवाजाही होती है। एक तरह से यह फ्लॉयओवर पुराने और नए शहर को सीधी जोड़ेगी।
फ्लॉयओवर से उपर से गुजरेगी ब्लू लाइन मेट्रो
अधिकारियों के अनुसार इस प्रोजेक्ट में सबसे नीचे सामान्य ट्रैफिक, बीच में 4-लेन का पक्का फ्लाईओवर से सीधे बोगदा पुल और आनंद नगर को जाने के लिए 650 मीटर लंबा फ्लॉयओवर रहेगा। इसके उपर ब्लू लाइन मेट्रो गुजरेगी। प्लॉयओवर से उपर करीबन 15.5 मीटर ऊंचा मेट्रो लाइन निकलेगी। इस तरह सुभाष नगर और रायसेन रोड के बीच यातायात सुगम हो जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि अभी प्रभात चैराहे के रायसेन रोड वाले हिस्से में फ्लायओवर बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। लगभग 6 पोल खड़े होंगे। इस पर प्लॉयओवर बिछाएंगे। प्लॉयओवर वाले हिस्से का निर्माण लगभग 73 करोड़ रुपए होगा।
कैपिटल से शुरू, चैराहे से आगे लैंड होगा फ्लाईओवर
अधिकारियों ने बताया कि यह फ्लाईओवर कैपिटल पेट्रोल पंप के पास से शुरू होकर प्रभात चैराहे से थोड़ा आगे जाकर लैंड होगा। पुल बोगदा मेट्रो स्टेशन से इसकी दूरी करीब 1.14 किमी होगी। फ्लाईओवर के अंतिम छोर के पास ही प्रभात मेट्रो स्टेशन प्रस्तावित है, जिससे कॉरिडोर की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।
ऐसे रहेगी डिजाइन
पहले चरण में पीडब्ल्यूडी ,फ्लायओवर के पिलर खड़े करेगा। इसमें मेट्रो के लिए बीच में करीब 2.5 मीटर व्यास परिधि के पिलर बनाए जाएंगे।
दूसरे चरण में फ्लाईओवर का डेक (सड़क वाला हिस्सा) तैयार किया जाएगा, जिसे पीडब्ल्यूडी को बनाना है। यह डेक दो हिस्सों में होगा, यानी अप और डाउन ट्रैक अलग-अलग रहेंगे।
- इस डबल-डेकर डिजाइन की सबसे खास बात मिड-गैप है। फ्लाईओवर के दोनों हिस्सों के बीच करीब 3.25 मीटर का गैप छोड़ा जाएगा। इसी गैप से मेट्रो के पिलर्स ऊपर की ओर गुजरेंगे।
- दोनों ओर से वाहनों के लिए अलग-अलग लेन (अप-डाउन) रहेंगी। यानी सड़क और मेट्रो एक ही कॉरिडोर में, लेकिन बिना एक-दूसरे को बाधित किए चलेंगी।
- ऊपर मेट्रो, नीचे हाई-स्पीड ट्रैफिक भी चलता रहेगा। कम इंटरफेरेंस फ्लाईओवर और मेट्रो के पिलर्स अलग-अलग, काम में कम टकराव होगा।
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