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June Panchak 2026 : 6 जून से शुरू होंगे मृत्यु पंचक, 11 जून तक रहेंगी पाबंदियां; जानें क्या करें और क्या नहीं

नीरज द्विवेदी

नीरज द्विवेदी

Jun 03, 2026
09:36 AM
6 जून से शुरू होंगे मृत्यु पंचक, 11 जून तक रहेंगी पाबंदियां; जानें क्या करें और क्या नहीं

धर्म डेस्क। हिंदू पंचांग के अनुसार जून माह में मृत्यु पंचक की शुरुआत 6 जून 2026 से होने जा रही है। ज्योतिष शास्त्र में पंचक को विशेष महत्व दिया गया है और इस अवधि में कुछ शुभ एवं मांगलिक कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि पंचक के दौरान किए गए कार्यों का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर पड़ सकता है।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस बार पंचक शनिवार से शुरू हो रहे हैं, इसलिए इन्हें मृत्यु पंचक कहा जाता है। पंचकों में मृत्यु पंचक को सबसे अधिक संवेदनशील माना जाता है। इस दौरान विशेष सावधानी बरतने और अनावश्यक जोखिमों से बचने की सलाह दी जाती है।

कब से कब तक रहेगा पंचक?

  • पंचक प्रारंभ: 6 जून 2026, शनिवार, शाम 7:03 बजे

  • पंचक समाप्त: 11 जून 2026, गुरुवार, सुबह 8:16 बजे

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क्या होता है पंचक?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों के दौरान बनने वाले विशेष योग को पंचक कहा जाता है। जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करता है, तब यह अवधि बनती है। धार्मिक मान्यताओं में पंचक काल को शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना गया है।

मृत्यु पंचक को क्यों माना जाता है विशेष?

मान्यता है कि शनिवार से शुरू होने वाले पंचक मृत्यु पंचक कहलाते हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस अवधि में नए कार्यों की शुरुआत, बड़े निवेश और मांगलिक कार्यों को टालना बेहतर माना जाता है। साथ ही स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर भी अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

पंचक के दौरान किन कार्यों से बचें?

  • लकड़ी या लकड़ी से बने सामान की खरीदारी न करें।

  • चारपाई बनवाने या बुनवाने से बचें।

  • घर की छत डलवाने या निर्माण कार्य शुरू न करें।

  • घर में पेंटिंग या रंगाई-पुताई का कार्य प्रारंभ न करें।

  • अत्यंत आवश्यक न हो तो दक्षिण दिशा की यात्रा टालें।

  • नए शुभ एवं मांगलिक कार्यों की शुरुआत से बचें।

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धार्मिक मान्यता क्या कहती है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक काल में किसी परिजन की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार विशेष विधि से करने की परंपरा है। कई स्थानों पर मृतक के साथ चार मोतीचूर के लड्डू या नारियल रखने की मान्यता भी प्रचलित है। माना जाता है कि इससे परिवार पर आने वाले संभावित संकटों का निवारण होता है।

नीरज द्विवेदी
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नीरज द्विवेदी

5 साल से ज्यादा का पत्रकारिता अनुभव। टीवी और प्रिंट मीडिया में कलमकारी की है। पॉलिटिकल और पब्लिक कनेक्ट की खबरों में दिलचल्पी। TV27NEWS DIGITAL में एंकरिंग भी कर रहे हैं।

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