अपराध संवाददाता बनने का था सपना : किस्मत ने बना दिया पर्दे की चमकती सितारा... जानिए मृणाल ठाकुर की दिलचस्प कहानी

मुंबई। आज मृणाल ठाकुर हिंदी और दक्षिण भारतीय सिनेमा की चर्चित अभिनेत्रियों में शुमार हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका पहला सपना अभिनेत्री बनने का नहीं था। वह अपराध संवाददाता बनकर खबरों की दुनिया में पहचान बनाना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने मास मीडिया की पढ़ाई भी शुरू की थी, लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था। एक छोटे से अवसर ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी और वह कैमरे के सामने अभिनय की दुनिया में पहुंच गईं।
पिता चाहते थे दंत चिकित्सक बनें, बेटी का सपना था अलग
1 अगस्त 1992 को महाराष्ट्र के धुले में जन्मीं मृणाल ठाकुर का पालन-पोषण एक मराठी परिवार में हुआ। उनके पिता चाहते थे कि बेटी दंत चिकित्सक बने, लेकिन मृणाल की रुचि पत्रकारिता में थी। उन्हें अपराध से जुड़ी खबरें कवर करने का जुनून था। इसी कारण उन्होंने मास मीडिया की पढ़ाई चुनी, ताकि अपने सपने को पूरा कर सकें।
कॉलेज में मिला अभिनय का मौका, बदल गई जिंदगी
कॉलेज की पढ़ाई के दौरान मृणाल को एक टीवी धारावाहिक का प्रस्ताव मिला। शुरुआत में परिवार इस फैसले के पक्ष में नहीं था और पढ़ाई पूरी करने की सलाह देता रहा। हालांकि मृणाल ने अपने परिवार को समझाया और अभिनय की दुनिया में कदम रखा। वर्ष 2012 में उन्होंने धारावाहिक मुझसे कुछ कहती... ये खामोशियां से छोटे पर्दे पर शुरुआत की। इसके बाद अर्जुन में नजर आईं, लेकिन कुमकुम भाग्य में बुलबुल अरोड़ा के किरदार ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया।
छोटे पर्दे से बड़े पर्दे तक बनाई पहचान
टेलीविजन पर सफलता के बाद मृणाल ने मराठी फिल्मों से बड़े पर्दे की ओर कदम बढ़ाया। इसके बाद वर्ष 2018 में लव सोनिया के जरिए हिंदी फिल्मों में प्रवेश किया। फिल्म व्यावसायिक रूप से बड़ी सफलता नहीं बन सकी, लेकिन उनके अभिनय को खूब सराहा गया। वर्ष 2019 में सुपर 30 और बाटला हाउस जैसी फिल्मों ने उन्हें बॉलीवुड में मजबूत पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने तूफान, धमाका, जर्सी, गुमराह और पिप्पा जैसी फिल्मों में अपनी अभिनय क्षमता का परिचय दिया।
सीता रामम ने दिलाई नई ऊंचाई
मृणाल ठाकुर के करियर का सबसे बड़ा मोड़ तेलुगु फिल्म सीता रामम साबित हुई। इस फिल्म में उनके अभिनय ने दर्शकों और समीक्षकों का दिल जीत लिया। इसके बाद श्हाय नन्नाश् में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और दक्षिण भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान स्थापित कर ली।
संघर्ष, सिद्धांत और सफलता की मिसाल
मृणाल ने अपने संघर्षों के बारे में खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि करियर की शुरुआत में भविष्य को लेकर कई बार असमंजस की स्थिति बनी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। शुरुआती दौर में उन्होंने कुछ फिल्मों के प्रस्ताव इसलिए ठुकरा दिए क्योंकि उनमें अंतरंग दृश्य थे और वह उस समय ऐसे दृश्यों के लिए सहज नहीं थीं। बाद में परिवार से खुलकर बातचीत कर उन्होंने अपने पेशे की जरूरतों को समझाया। आज अपनी मेहनत और दमदार अभिनय के दम पर मृणाल ठाकुर कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीत चुकी हैं और भारतीय सिनेमा की सबसे भरोसेमंद अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
