गंदी नाली के कीड़े बन गए हो... : जंतर-मंतर आंदोलन पर भड़के महाभारत के भीष्म पितामह, कहा- ऐसे लोगों को समाज से करो बाहर, युवाओं को भी दी चेतावनी

नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन को लेकर छिड़ी सियासी और सामाजिक बहस के बीच अभिनेता मुकेश खन्ना ने बेहद तल्ख अंदाज में अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल लोगों पर जमकर भड़ास निकाली है। उन्होंने कड़ी नसीहत देते हुए कहा कि असली छात्र कभी अभद्र भाषा का सहारा नहीं लेते। अभिनेता ने आरोप लगाया कि कुछ लोग छात्रों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हित साधने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे लोगों को गंदी नाली के कीड़े बताते हुए समाज से दूर रखने की बात कही। साथ ही युवाओं से अपील की कि छात्र ऐसे लोगों के बहकावे में न आएं।
देश का भविष्य ऐसे हाथों में गया तो चिंता की बात
मुकेश खन्ना ने अपने सामाजिक माध्यम पर जारी वीडियो में कहा कि भले ही वह इस समय भारत से बाहर हैं, लेकिन देश की हर गतिविधि पर उनकी नजर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि यदि यही आज का युवा वर्ग है, तो आने वाले वर्षों में देश का भविष्य चिंता का विषय बन जाएगा। उनके अनुसार, आंदोलन के दौरान जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया गया, वह किसी जिम्मेदार छात्र की भाषा नहीं हो सकती।
असली छात्रों का आंदोलन नहीं था
अभिनेता ने दावा किया कि यह आंदोलन वास्तविक छात्रों का नहीं, बल्कि कुछ लोगों द्वारा प्रायोजित किया गया अभियान था। उनका कहना था कि कुछ लोग छात्रों को आगे करके सरकार के खिलाफ माहौल बनाना चाहते हैं, जबकि बाद में वही लोग अपने हित साधने में लग जाते हैं। उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा नुकसान उन छात्रों को उठाना पड़ता है, जो भावनाओं में बहकर ऐसे आंदोलनों का हिस्सा बन जाते हैं।
युवाओं को दी सख्त चेतावनी
मुकेश खन्ना ने आंदोलन में शामिल युवाओं को चेतावनी देते हुए कहा कि सार्वजनिक मंचों पर दिए गए उनके बयान हमेशा के लिए दर्ज हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि आज जोश में कही गई बातें भविष्य में नौकरी, सरकारी अवसर और विदेश जाने जैसी संभावनाओं को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि किसी के बहकावे में आने के बजाय अपने भविष्य पर ध्यान दें।
ऐसे लोगों को समाज से दूर रखना जरूरी
अभिनेता ने अपने संदेश में आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों के लिए बेहद कठोर शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि जिस तरह घर में गंदगी फैलाने वाले कीड़ों को बाहर किया जाता है, उसी तरह समाज में नफरत और अशांति फैलाने वालों से भी दूरी बनानी चाहिए। उनका कहना था कि युवाओं को ऐसे लोगों के प्रभाव से जितनी जल्दी बाहर निकलेंगे, उतना ही उनके भविष्य के लिए बेहतर होगा।
क्या है पूरा विवाद
जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के दौरान शिक्षा व्यवस्था और विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ था। बाद में संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव भी हुआ। इसी घटनाक्रम को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस छिड़ी हुई है। अब मुकेश खन्ना की तीखी टिप्पणी ने इस विवाद को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
