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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: : ग्लासगो में जैस्मिन का स्वर्णिम पंच, भारतीय बॉक्सिंग में लिखा नया इतिहास

admin

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Aug 01, 2026
02:22 PM
ग्लासगो में जैस्मिन का स्वर्णिम पंच, भारतीय बॉक्सिंग में लिखा नया इतिहास

नई दिल्ली। भारतीय महिला बॉक्सिंग के लिए एक और गौरव का पल सामने आया है। प्रीति पवार के गोल्ड मेडल जीतने के बाद अब जैस्मिन लेंबोरिया ने भी अपने शानदार प्रदर्शन से देश का नाम रोशन किया है। महिला बॉक्सिंग के 57 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल में जैस्मिन ने नॉर्दर्न आयरलैंड की मिकेला वॉल्श को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनकी इस ऐतिहासिक जीत के साथ भारतीय बॉक्सिंग में एक नया अध्याय जुड़ गया है।

फाइनल में दिखाया दम, हर राउंड में बनाई बढ़त

जैस्मिन लेंबोरिया ने फाइनल मुकाबले की शुरुआत बेहद आत्मविश्वास के साथ की। पहले राउंड में उन्होंने मिकेला वॉल्श पर दबाव बनाए रखा और शानदार पंचों के दम पर बढ़त हासिल की। पांच में से तीन जजों ने जैस्मिन के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद दूसरे राउंड में भी उनका दबदबा कायम रहा और उन्होंने मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। जजों के स्कोरकार्ड में बढ़त बनाने के बाद जैस्मिन ने आखिरी राउंड में भी संयम और आक्रामकता का बेहतरीन तालमेल दिखाया।

बॉक्सिंग की विरासत से निकली चैंपियन

हरियाणा का भिवानी जिला भारतीय बॉक्सिंग की नर्सरी के रूप में पहचाना जाता है। इसी मिट्टी से निकली जैस्मिन लेंबोरिया ने देश को गौरवान्वित किया है। उनका परिवार भी बॉक्सिंग से गहराई से जुड़ा रहा है। वह एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता महान मुक्केबाज हवा सिंह की परपोती हैं। उनके चाचा संदीप सिंह और परविंदर सिंह भी राष्ट्रीय स्तर के बॉक्सर रहे हैं। परिवार से मिली प्रेरणा और कठिन मेहनत के दम पर जैस्मिन ने कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

बर्मिंघम से शुरू हुआ सफलता का सफर

जैस्मिन के करियर में साल 2022 का बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेल बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। उन्होंने वहां कांस्य पदक जीतकर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद वह भारतीय सेना में शामिल होने वाली पहली महिला मुक्केबाज बनीं। उन्हें कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस में जगह मिली और मिशन ओलंपिक विंग के तहत प्रशिक्षण दिया गया। सेना के अनुशासन ने उनके खेल को और निखारा।

हार से सीख लेकर बनीं विजेता

पेरिस ओलंपिक में शुरुआती दौर में बाहर होने के बाद जैस्मिन ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी फिटनेस, तकनीक और मानसिक मजबूती पर काम किया। आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने शानदार वापसी की।

धोनी के शांत स्वभाव से लेती हैं प्रेरणा

जैस्मिन भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को अपना आदर्श मानती हैं। उनका मानना है कि रिंग में दबाव के समय शांत रहना सफलता की कुंजी है। धोनी के इसी अंदाज को अपनाते हुए जैस्मिन ने बड़े मुकाबलों में धैर्य और आत्मविश्वास दिखाया।

जैस्मिन लेंबोरिया की यह जीत सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि भारतीय महिला बॉक्सिंग की बढ़ती ताकत और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा की मिसाल बन गई है।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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