भोजशाला से विकास का शंखनाद: : धार में बनेगा भव्य सरस्वती लोक, राजा भोज शोध संस्थान की भी घोषणा, गंगा दशहरा पर CM मोहन ने दी करोड़ों की सौगात

भोपाल/धार। गंगा दशहरा के अवसर पर धार में आयोजित जल गंगा संवर्धन अभियान के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ऐतिहासिक घोषणाओं के साथ जिले के विकास को नई दिशा देने का संकल्प जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में भव्य सरस्वती लोक का निर्माण कराया जाएगा तथा राजा भोज की स्मृतियों और उनके योगदान को संरक्षित करने के लिए राजा भोज शोध संस्थान की स्थापना भी की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भोजशाला केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान और संस्कृत परंपरा का गौरवशाली केंद्र रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भोजशाला के गौरवशाली अतीत को पुनर्जीवित करने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी और उच्च न्यायालय के आदेश का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करेगी।
धार में विकास की नई धारा बहेगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजा भोज की कर्मस्थली धार अब विकास के नए युग में प्रवेश कर रही है। पुरातत्व विभाग के समन्वय से क्षेत्र के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण के साथ-साथ आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मां वाग्देवी के आशीर्वाद से धार को प्रदेश के प्रमुख सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 88.04 करोड़ रुपए लागत के 12 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इनमें 27.21 करोड़ रुपए की लागत से चंबल नदी पर लेबड़-घाटाविल्लौद मार्ग पर बनने वाले फोरलेन उच्च स्तरीय पुल का भूमिपूजन भी शामिल है।
जल संरक्षण में अग्रणी बन रहा मध्यप्रदेश
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संरक्षण को लेकर प्रदेश सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप मिला है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत 2 लाख 42 हजार से अधिक कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिन पर लगभग 2500 करोड़ रुपए की लागत से काम चल रहा है।
उन्होंने कहा कि अब तक 89 हजार से अधिक कुओं का रिचार्ज किया जा चुका है, 55 हजार से ज्यादा खेत तालाब बनाए गए हैं तथा 105 अमृत सरोवर विकसित किए जा चुके हैं। नगरीय निकायों ने जहां 2224 कार्यों का लक्ष्य रखा था, वहीं 9630 कार्य पूरे कर लक्ष्य से कई गुना बेहतर प्रदर्शन किया है। जल संरक्षण के क्षेत्र में खंडवा, बड़वानी, अशोकनगर, राजगढ़, डिंडौरी और धार जिले उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं।
राजा भोज की विरासत को सहेजने का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजा भोज जल संरक्षण, स्थापत्य कला और ज्ञान परंपरा के अद्वितीय प्रतीक थे। भोपाल का विशाल तालाब, भोजपुर का भव्य शिवलिंग और अन्य ऐतिहासिक धरोहरें उनकी दूरदर्शिता का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि राजा भोज ने साहित्य और विद्वत्ता को संरक्षण दिया तथा विद्वानों को सम्मानित करने की अनूठी परंपरा स्थापित की। मुख्यमंत्री ने बताया कि भोपाल में भी राजा भोज संग्रहालय विकसित किया जा रहा है, जिससे नई पीढ़ी को उनके योगदान की जानकारी मिल सकेगी।
भोजशाला आंदोलन के शहीदों को सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने भोजशाला आंदोलन में शहादत देने वाले स्व. बनसिंह, स्व. अंतरसिंह और स्व. लक्ष्मण सिंह के निकटतम परिजनों को राज्य सरकार की ओर से पांच-पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। तीनों शहीदों को मौन रखकर श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने भोजशाला पहुंचकर मां वाग्देवी के दर्शन किए और प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री सावित्री ठाकुर, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक नीना विक्रम वर्मा, विधायक कालू सिंह ठाकुर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित रहे।
धार को सांस्कृतिक और औद्योगिक पहचान देने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च न्यायालय के फैसले से वर्षों पुराना संघर्ष सफल हुआ है और धार में नए युग की शुरुआत हुई है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरस्वती लोक और राजा भोज शोध संस्थान न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेंगे, बल्कि पर्यटन, शोध और स्थानीय विकास को भी नई गति देंगे। धार अब सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास का संगम बनकर उभरेगा।
admin
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
