मप्र विधानसभा मानसून सत्र : बीएनएनएस संशोधन विधेयक को सदन की हरी झंडी, नीट पर मचा सियासी संग्राम, विपक्ष की मांग को सरकार ने ठुकराया

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का तीसरा दिन सियासी गर्मी और तीखी बहस के बीच गुजरा। सदन में जहां सरकार ने कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराए, वहीं नीट पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्ष ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया, जबकि सत्ता पक्ष ने सदन की नियम प्रक्रिया का हवाला देते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता संशोधन विधेयक हुआ पारित
सत्र के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता संशोधन विधेयक 2026 को सदन में मंजूरी मिल गई। गृह मंत्री गौतम टेटवाल ने विधेयक को चर्चा के लिए प्रस्तुत किया। हालांकि चर्चा के दौरान कांग्रेस की ओर से किसी विधायक ने हिस्सा नहीं लिया।
भाजपा विधायक जितेंद्र उदय सिंह पंड्या ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि नए प्रावधानों के तहत कुछ मामलों में पक्षकार अदालत में समझौते के लिए आवेदन कर सकेंगे। हालांकि अंतिम फैसला न्यायालय के विवेक पर निर्भर रहेगा।
विधायक अनिरुद्ध माधव मारु ने कहा कि महिलाओं से जुड़े मामलों में विशेष व्यवस्था रखी गई है और पूरी प्रक्रिया अदालत की निगरानी में होगी। मंत्री गौतम टेटवाल ने बताया कि बलवा, सार्वजनिक स्थान पर अश्लील हरकत, गाली-गलौज और पति या उससे संबंधित महिला के साथ क्रूरता जैसे कुछ मामलों को समझौता योग्य बनाया गया है। उन्होंने कहा कि महिला की सहमति और न्यायालय की अनुमति के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
निजी विश्वविद्यालय विधेयक पर कांग्रेस का विरोध
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन संशोधन विधेयक 2026 सदन में रखा। इस पर कांग्रेस विधायक महेश परमार ने सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के नियमों में ढील देने से शिक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। कांग्रेस विधायक ने कहा कि 25 एकड़ जमीन की अनिवार्यता में छूट और पांच करोड़ रुपये की एफडी की शर्त खत्म करने से कई संस्थान बिना पर्याप्त तैयारी के शुरू हो सकते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इससे छात्रों के भविष्य पर असर पड़ेगा और कई संस्थान फीस लेने के बाद बंद हो सकते हैं।
सोलर प्लांट मुद्दे पर सरकार से भिड़ी कांग्रेस
कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने राजपुर विधानसभा क्षेत्र में प्रस्तावित सोलर प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में पांचवीं अनुसूची और पैसा एक्ट के प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा है। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने जवाब देते हुए कहा कि अभी केवल सर्वे का काम चल रहा है और बिना आदिवासी समुदाय से चर्चा और अनुमति के कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा।
नीट मुद्दे पर सदन में जोरदार टकराव
सत्र का सबसे गर्म मुद्दा नीट पेपर लीक रहा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मामले पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है और इस पर सदन में चर्चा होनी चाहिए।
संसदीय कार्य मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि विधानसभा नियमों के अनुसार चलती है और हर प्रस्ताव के लिए निर्धारित प्रक्रिया होती है। उन्होंने कहा कि स्थगन प्रस्ताव पर फैसला नियमों के तहत ही होगा।
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि वह इस मामले में व्यवस्था देंगे और सदन को सुचारु रूप से चलने देना चाहिए। बाद में उन्होंने उमंग सिंघार का स्थगन प्रस्ताव यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि मामला मध्य प्रदेश सरकार से संबंधित नहीं है।
छात्रों के मुद्दे पर सत्ता-विपक्ष आमने-सामने
स्थगन प्रस्ताव खारिज होने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा। उमंग सिंघार ने कहा कि विधानसभा में समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है, लेकिन छात्रों के भविष्य से जुड़े मामले पर चर्चा नहीं कराई जा रही।
भाजपा विधायकों ने पलटवार करते हुए कहा कि आसंदी का निर्णय अंतिम होता है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सदन में कई बार तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
मानसून सत्र के तीसरे दिन विधेयकों की मंजूरी के साथ-साथ नीट मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव साफ दिखाई दिया। आने वाले दिनों में भी सदन में छात्र, शिक्षा और प्रशासनिक सुधार से जुड़े मुद्दों पर सियासी घमासान जारी रहने के संकेत हैं।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
