कश्मीर पर दखल देने से पहले समझे सीमा : यूएन के मंच से ओआईसी को भारत की दो टूक, कहा- ऐसे विवादों में दखल देना उचित नहीं

संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे पर स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाते हुए ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) को नसीहत दी कि जिन संगठनों का किसी क्षेत्रीय विवाद से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, उन्हें ऐसे मामलों में हस्तक्षेप से बचना चाहिए। भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर वही संस्थाएं प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं, जिनके पास क्षेत्रीय समझ और आवश्यक विशेषज्ञता हो।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने सुरक्षा परिषद में विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के तंत्र को मजबूत करने विषय पर आयोजित खुली बहस के दौरान कहा कि ऐसे अंतर-क्षेत्रीय संगठन, जो न तो भौगोलिक रूप से संबंधित हैं और न ही साझा क्षेत्रीय हित रखते हैं, उन्हें संवेदनशील विवादों में दखल देने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे संगठनों के पास न तो पर्याप्त क्षेत्रीय जानकारी होती है और न ही विषय से जुड़ी विशेषज्ञता, इसलिए उनकी भूमिका समाधान के बजाय भ्रम पैदा कर सकती है।
पाकिस्तान ने फिर उठाया कश्मीर का मुद्दा
बैठक के दौरान पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए इसे दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता की सबसे बड़ी चुनौती बताया। भारत ने बिना पाकिस्तान का नाम लिए स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान तथ्यों और स्थापित अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं के आधार पर होना चाहिए, न कि बाहरी मंचों पर राजनीतिक बयानबाजी के जरिए।
व्प्ब् की भूमिका पर भारत की आपत्ति बरकरार
हालांकि भारतीय प्रतिनिधि ने अपने बयान में ओआईसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका संकेत स्पष्ट रूप से उसी संगठन की ओर था। ओआईसी विभिन्न मंचों पर कई बार जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाता रहा है। भारत का कहना है कि धार्मिक आधार पर गठित यह संगठन क्षेत्रीय सुरक्षा या विवाद समाधान की जिम्मेदार संस्था नहीं है, इसलिए कश्मीर जैसे मामलों में उसकी टिप्पणी उचित नहीं मानी जा सकती।
पुराने प्रस्तावों की भी दिलाई याद
भारत ने अप्रत्यक्ष रूप से यह भी याद दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र के 1948 के प्रस्तावों में सबसे पहले पाकिस्तान को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से अपने सैनिकों और लड़ाकों को हटाने की बात कही गई थी। भारत का रुख है कि पाकिस्तान ने इन मूल शर्तों का कभी पालन नहीं किया और वर्षों तक सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देता रहा। ऐसे में कश्मीर पर एकतरफा बयान देने के बजाय संबंधित पक्षों को पहले पुराने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करना चाहिए।
भारत का स्पष्ट संदेश
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से दोहराया कि क्षेत्रीय विवादों के समाधान के लिए जिम्मेदार और प्रासंगिक संस्थाओं की भूमिका ही प्रभावी हो सकती है। भारत का मानना है कि बाहरी या गैर-क्षेत्रीय संगठनों की अनावश्यक टिप्पणियां समाधान में मदद करने के बजाय विवाद को और जटिल बनाती हैं।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
