Sawan 2026: : जानिए भगवान शिव को क्यों सबसे प्रिय है सावन का महीना , क्या है पूजा विधि, सोमवार व्रत की तिथियां और बेलपत्र चढ़ाने का रहस्य

पलक गीते की रिपोर्ट
आज से भगवान शिव को समर्पित श्रावण (सावन) मास का शुभारंभ हो गया है। हिंदू धर्म में सावन को वर्ष का सबसे पवित्र और पुण्यदायी महीना माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पूरे महीने भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है तथा जीवन की अनेक बाधाएं दूर हो जाती हैं।
सावन के पहले दिन से ही देशभर के शिवालयों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। मंदिरों में "हर-हर महादेव" और "ॐ नमः शिवाय" के जयघोष से वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया है। श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, बेलपत्र, धतूरा, भांग और आक के फूलों से रुद्राभिषेक कर उनकी विशेष आराधना कर रहे हैं।
समुद्र मंथन से जुड़ी है जलाभिषेक की परंपरा**
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार समुद्र मंथन के समय जब "कालकूट विष" निकला, तब उसकी भीषण ज्वाला से समस्त सृष्टि संकट में पड़ गई। संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया, जिसके कारण उनका कंठ नीला पड़ गया और वे "नीलकंठ" कहलाए।
मान्यता है कि विष की तीव्रता को शांत करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने भगवान शिव पर निरंतर जल अर्पित किया। तभी से सावन मास में शिवलिंग पर जलाभिषेक करने की परंपरा प्रारंभ हुई। माना जाता है कि श्रद्धा से किया गया जलाभिषेक भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होता है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करता है।
माता पार्वती की तपस्या से जुड़ा है सावन का महत्व**
सावन मास का संबंध केवल भगवान शिव ही नहीं, बल्कि माता पार्वती से भी जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए अनेक वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। उनकी अटूट भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।
इसी कारण सावन का महीना विशेष रूप से अविवाहित युवतियों और नवविवाहित दंपत्तियों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो कन्याएं सावन सोमवार का व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं, उन्हें मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है। वहीं विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से यह व्रत करती हैं।
सावन के पहले दिन कैसे करें भगवान शिव की पूजा?
यदि आप सावन के प्रथम दिन भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
इसके बाद शिवलिंग का गंगाजल या शुद्ध जल से अभिषेक करें। फिर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से तैयार पंचामृत अर्पित करें। इसके पश्चात बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद पुष्प और चंदन अर्पित करें।
पूजा के दौरान कम से कम108 बार "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें। अंत में शिव चालीसा, रुद्राष्टक अथवा महामृत्युंजय मंत्र का पाठ कर भगवान शिव से परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में आने वाली बाधाओं के निवारण की प्रार्थना करें।
सावन सोमवार 2026 की तिथियां
इस वर्ष सावन मास में चार सोमवार पड़ रहे हैं, जिनका विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
पहला सावन सोमवार – 3 अगस्त 2026**
दूसरा सावन सोमवार – 10 अगस्त 2026**
तीसरा सावन सोमवार – 17 अगस्त 2026**
चौथा सावन सोमवार – 24 अगस्त 2026**
इन चारों सोमवारों पर भगवान शिव का व्रत और रुद्राभिषेक करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
सावन में क्या करें और किन बातों का रखें विशेष ध्यान?**
सावन के पूरे महीने सात्विक जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है। श्रद्धालुओं को मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। इसके साथ ही झूठ बोलने, छल-कपट करने, किसी का अपमान करने तथा क्रोध और विवाद से बचने की भी सलाह दी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर हल्दी, तुलसी और केतकी का फूल अर्पित नहीं करना चाहिए। इसके स्थान पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन और सफेद पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है।
भगवान शिव को बेलपत्र इतना प्रिय क्यों है?**
सावन के महीने में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा सदियों पुरानी है। अक्सर लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि आखिर भगवान शिव को बेलपत्र ही क्यों अर्पित किया जाता है?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इसकी तीन पत्तियां ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक मानी जाती हैं। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास से अर्पित किया गया एक बेलपत्र भी भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए पर्याप्त होता है। यही कारण है कि सावन के पूरे महीने शिव भक्त बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
कांवड़ यात्रा का क्या है धार्मिक महत्व?**
सावन मास के साथ ही देशभर में प्रसिद्ध कांवड़ यात्रा भी प्रारंभ हो जाती है। लाखों शिवभक्त हरिद्वार, गंगोत्री, प्रयागराज, उज्जैन और अन्य पवित्र नदियों से जल भरकर पैदल यात्रा करते हुए अपने क्षेत्र के शिव मंदिरों तक पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
कांवड़ यात्रा को भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था, समर्पण और भक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। इस दौरान देशभर में भगवा वस्त्र धारण किए हुए कांवड़िए "बोल बम" और "हर-हर महादेव" के जयघोष के साथ अपनी यात्रा पूरी करते हैं।
सावन का संदेश
सावन केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि संयम, श्रद्धा, सेवा, भक्ति और सकारात्मक जीवन जीने का संदेश देने वाला पावन महीना है। भगवान शिव को संहार और सृजन दोनों का देवता माना जाता है। इसलिए सावन हमें यह भी सिखाता है कि जीवन में धैर्य, करुणा, आत्मसंयम और प्रकृति के प्रति सम्मान बनाए रखना ही सच्ची शिव भक्ति है।
हर-हर महादेव!
भगवान भोलेनाथ की कृपा से यह सावन आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और नई ऊर्जा लेकर आए।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
