पेरिरा में भूकंप ने भारी मचाई तबाही : 36 घंटे बाद मलबे से निकली जिंदगी, डेनिएला की सांसों ने जगाई उम्मीद

कोलंबिया के पश्चिमी शहर पेरिरा में भूकंप ने भारी तबाही मचाई। कई इमारतें ढह गईं और बड़ी संख्या में लोग मलबे में फंस गए। इसी दौरान डेनिएला लार्गो सांचेज एक ढहे होटल के नीचे दब गईं। मंगलवार दोपहर करीब एक बजे बचावकर्ताओं को मलबे के नीचे उनकी मौजूदगी का संकेत मिला।
इसके बाद रेस्क्यू टीम ने बिना समय गंवाए अभियान शुरू किया। करीब दस घंटे तक लगातार खुदाई की गई। रास्ते में चार परतों वाले कंक्रीट को हटाना पड़ा। मलबा बेहद अस्थिर था और आफ्टरशॉक का खतरा भी बना हुआ था, इसलिए बचावकर्मियों ने ऊपर से मलबा हटाने के बजाय नीचे से सुरंग बनाकर डेनिएला तक पहुंचने का फैसला किया।
ऑक्सीजन के सहारे चलती रही सांसें
मलबे के भीतर फंसी डेनिएला को ऑक्सीजन मास्क और सिलेंडर के जरिए सांस लेने में मदद दी गई। बचाव अभियान में पेरिरा अग्निशमन विभाग, बोगोटा अग्निशमन विभाग और विशेष आपात एवं आपदा संचालन इकाई पोनल्सार की टीमें शामिल थीं।
जब डेनिएला को नीले कंबल में लपेटकर मलबे से बाहर निकाला गया, तो मौके पर मौजूद परिवार, स्वयंसेवकों और बचावकर्मियों में खुशी की लहर दौड़ गई। उन्हें तत्काल स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मां ने कहा- उम्मीद लगभग टूट गई थी
डेनिएला की मां सैंड्रा मिलेना पेरेज ने बताया कि एक समय उन्हें लगा था कि बेटी अब नहीं मिलेगी। लेकिन एक स्थानीय व्यक्ति ने मलबे के नीचे से आवाज सुनी और तुरंत मदद शुरू की। उसकी सूचना के बाद पेशेवर बचाव दल मौके पर पहुंचा और डेनिएला को बचाने में जुट गया। घर पर उनका 12 वर्षीय बेटा अपनी मां का इंतजार कर रहा था।
अब भी जारी है दर्जनों लोगों की तलाश
सरकार के अनुसार पेरिरा में 40 से अधिक लोगों की तलाश जारी थी। देश में भूकंप से मरने वालों की संख्या 240 से ऊपर पहुंच चुकी थी और कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका थी। डेनिएला का 36 घंटे बाद जिंदा मिलना इस मुश्किल अभियान में उम्मीद की बड़ी किरण बनकर सामने आया है। यह रेस्क्यू ऑपरेशन बताता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी बचाव दल आखिरी उम्मीद तक जिंदगी की तलाश जारी रख सकते हैं।
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