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इटली की स्कूलों में बुर्का-नकाब पर पाबंदी : मेलोनी सरकार का बड़ा फैसला, नियम तोड़ने पर एक्शन

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Sep 25, 2026
06:29 AM
मेलोनी सरकार का बड़ा फैसला, नियम तोड़ने पर एक्शन

रोम । इटली के स्कूलों को लेकर प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने क्लासरूम में विदेशी छात्रों की सीमा और बुर्का-नकाब पर प्रतिबंध को मंजूरी दे दी है। मेलोनी ने कहा कि ये कदम छात्रों को बांटने के लिए नहीं बल्कि सभी को समान अवसर देने के लिए है।

कक्षाओं में 30 फीसदी तक ही होंगे भाषा में कमजोर छात्र

मेलोनी ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म X पर पोस्‍ट में लिखा, ष्आज हमने मंत्रिपरिषद में स्कूलों से जुड़े एक आदेश को मंजूरी दी। इसके तहत कक्षाओं में उन छात्रों की संख्या अधिकतम 30 प्रत‍िशत तक रखने की सीमा तय की गई है, जिन्हें इतालवी भाषा ठीक से नहीं आती। साथ ही, उन्हें इतालवी भाषा सीखने में मदद के लिए सुविधाएं दी जाएंगी और स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने की इजाजत नहीं होगी।ष्

उन्‍होंने कहा क‍ि ये ऐसे व्यावहारिक कदम है, जिनका मकसद लोगों को बांटना नहीं बल्कि उन्हें वास्तव में एक-दूसरे के साथ घुलने-मिलने में मदद करना है। इससे ऐसी अलग-थलग कक्षाएं बनने से बचा जा सकेगा, जहां एक खास समुदाय के छात्र ही ज्यादा हों और सभी छात्रों को बराबर मौके मिलेंगे।

बुर्का और नकाब पर स्कूलों में रोक

मेलोनी ने बताया क‍ि हम आगे भी इसी दिशा में बढ़ना चाहते हैं, यानी ऐसा स्कूल सिस्टम जो नियमों से समझौता किए बिना सभी को साथ लेकर चले, जिन छात्रों को ज्यादा मुश्किलें हैं उनकी मदद करे और हर छात्र को एक बराबर शुरुआत का मौका दे। प्रस्तावित नियम विशेष रूप से स्कूलों में पूरे चेहरे को ढकने वाले परिधानों पर रोक से जुड़े हैं। बुर्का और नकाब में चेहरा ढका रहता है जबकि हिजाब में आम तौर पर सिर और गर्दन ढके होते हैं लेकिन चेहरा खुला रहता है। मेलोनी की घोषणा में बुर्का और नकाब का उल्लेख किया गया है।

कानून को लेकर आगे की प्रक्रिया

चेहरा ढकने पर प्रतिबंध इटली के लिए बिल्कुल नया विषय नहीं है। देश में 1975 का एक कानून सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे हेलमेट या कपड़े से संबंधित है, जिससे व्यक्ति की पहचान मुश्किल हो सकती है। हालांकि, बुर्का या नकाब पर देशव्यापी स्पष्ट प्रतिबंध अब तक नहीं है। मेलोनी सरकार का नया प्रस्ताव खास तौर पर स्कूलों पर केंद्रित है और इसे कानून बनने के लिए संसदीय मंजूरी की जरूरत होगी।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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