होम्योपैथिक गोली और राज खुल गया, : ‘दिमागी नक्सल’ पर मोदी का करारा तंज

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर उठे सियासी बवाल को लेकर अब आलोचकों पर सीधा हमला बोला है। शनिवार को श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी समारोह में पीएम मोदी ने लाल किले से दिए अपने बयान का जिक्र करते हुए विरोधियों पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ नाम की होम्योपैथिक गोली दी थी और अब उसका असर दिखाई देने लगा है। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि इस बयान के बाद जिस तरह की बेचैनी और बौखलाहट सामने आ रही है, उससे साफ है कि निशाना सही जगह लगा है और जनता सबकुछ देख-समझ रही है।
‘गोली दी तो बीमारी बढ़कर बाहर आने लगी’
प्रधानमंत्री ने होम्योपैथी के सिद्धांत का उदाहरण देते हुए कहा कि इस पद्धति में कई बार दवा शुरू करने के बाद बीमारी शुरुआती दौर में ज्यादा उभरती हुई दिखाई देती है। इसी तर्ज पर उन्होंने अपने ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को लेकर कहा कि लाल किले से दी गई उनकी ‘होम्योपैथिक गोली’ का असर अब दिख रहा है।
मोदी ने कहा कि 2013 की तुलना में आज देश आर्थिक और सामाजिक रूप से कहीं अधिक सुरक्षित है। उनके मुताबिक, देश की बदलती स्थिति देखकर कुछ लोगों की छटपटाहट और बौखलाहट बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि ‘दिमागी नक्सल’ की गोली के बाद ऐसे लोग एक-एक कर सामने आ रहे हैं और जनता भी उन्हें पहचान रही है।
2013 का हवाला देकर पिछली सरकारों पर निशाना
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पिछली सरकारों के कामकाज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज देश जिस स्थिति में पहुंचा है, उसे हासिल करना आसान नहीं था। उन्होंने 2013 में केदारनाथ में आई भीषण आपदा का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय पूरी सरकार हिल गई थी और उसे समझ नहीं आ रहा था कि संकट से कैसे निपटा जाए।
2008 के संकट और मुंबई हमले का जिक्र
मोदी ने 2008 के वैश्विक बैंकिंग संकट का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय की सरकार संकट से निपटने के बजाय वर्षों तक उसके पीछे छिपती रही और बैंकिंग व्यवस्था तबाही के कगार पर पहुंच गई।
प्रधानमंत्री ने इसी दौर में हुए मुंबई आतंकी हमले का जिक्र करते हुए पिछली सरकार पर पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा कदम उठाने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उस समय सरकार बाहरी दबाव में आ गई थी और पाकिस्तान को सबक सिखाने का साहस नहीं दिखा सकी।
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