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वैष्णव तिकल, अलौकिक श्रृंगार : निर्जला एकादशी पर ऐसे बाबा महाकाल, भस्म आरती में दिव्य दर्शन कर धन्य हुए भक्त

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jun 25, 2026
06:30 AM
निर्जला एकादशी पर ऐसे बाबा महाकाल, भस्म आरती में दिव्य दर्शन कर धन्य हुए भक्त

उज्जैन। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पावन निर्जला एकादशी पर धार्मिक नगरी उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। तड़के होने वाली दिव्य भस्म आरती में शामिल होने के लिए हजारों श्रद्धाल देर रात से ही बाबा महाकाल का दर्शन पाने के लिए लालायित दिखे। मंदिर के प्रवेश मार्गों पर लंबी कतारें नजर आईं और हर ओर जय श्री महाकाल के जयघोष गूंजते रहे।

प्रतिदिन की परंपरा के अनुसार सुबह लगभग चार बजे भगवान महाकाल को जागृत किया गया। इसके बाद पुजारियों ने विधि-विधान से उनका अभिषेक और पूजन किया। निर्जला एकादशी के विशेष अवसर पर बाबा महाकाल का वैष्णव तिलक के साथ आकर्षक और अलौकिक श्रृंगार किया गया, जिसने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रृंगार दर्शन के बाद भव्य भस्म आरती संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया।

भस्म आरती की परंपरा और आध्यात्मिक महत्व

महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी विशेष पहचान रखती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पहले बाबा महाकाल को श्मशान की चिता की भस्म अर्पित की जाती थी, लेकिन वर्तमान में कपिला गाय के गोबर और विभिन्न औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार की गई पवित्र भस्म का उपयोग किया जाता है। भस्म रमाने के पश्चात भगवान महाकाल भक्तों को दिव्य दर्शन देते हैं, जिसे अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना जाता है।

भस्म आरती में शामिल होने के लिए पुरुष श्रद्धालुओं को धोती-सोला तथा महिलाओं को साड़ी धारण करने की परंपरा का पालन करना होता है। इसी कारण देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।

निर्जला एकादशी का विशेष महत्व

हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी को सबसे पुण्यदायी और श्रेष्ठ एकादशियों में गिना जाता है। इसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन श्रद्धालु बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत रखते हैं तथा भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से वर्षभर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है। साथ ही जल से भरा कलश, फल, वस्त्र और छाता दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। निर्जला एकादशी पर महाकाल के दिव्य दर्शन ने श्रद्धालुओं की आस्था को और अधिक प्रगाढ़ बना दिया।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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