छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र : 13 से 17 जुलाई तक चलेगा छत्तीसगढ़ विधानसभा का पावस सत्र, खाद संकट से लेकर कानून-व्यवस्था तक कई मुद्दों पर घमासान के आसार

छत्तीसगढ़ विधानसभा के आगामी पावस सत्र की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू होकर 17 जुलाई तक चलेगा। पांच दिवसीय इस सत्र में कुल पांच बैठकें आयोजित की जाएंगी। माना जा रहा है कि किसानों से जुड़े मुद्दों, खाद-बीज की उपलब्धता, कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों और जनहित के कई महत्वपूर्ण विषयों पर सदन में जोरदार चर्चा देखने को मिलेगी। वहीं विपक्ष भी सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की तैयारी में जुट गया है।
विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक छत्तीसगढ़ विधानसभा का पावस सत्र 13 जुलाई से 17 जुलाई तक आयोजित होगा। पांच दिनों तक चलने वाले इस सत्र में कुल पांच बैठकें होंगी। प्रदेश में मानसून के बीच किसानों को खाद और बीज की उपलब्धता, कृषि व्यवस्था, सिंचाई सुविधाएं, ग्रामीण विकास और विभिन्न जनहित के मुद्दे सदन में प्रमुखता से उठ सकते हैं।
पावस सत्र में संभावित प्रमुख मुद्दे
• किसानों को खाद और बीज की उपलब्धता
• कृषि एवं सिंचाई व्यवस्था
• कानून-व्यवस्था की स्थिति
• विकास कार्यों की प्रगति
• बेरोजगारी और युवाओं के मुद्दे
• नगरीय एवं ग्रामीण समस्याएं
• जनहित से जुड़े लंबित मामले
वहीं विपक्ष सरकार को घेरने के लिए पहले से ही रणनीति तैयार कर रहा है। पिछले विधानसभा सत्रों में भी विपक्ष ने खाद संकट, धान खरीदी, बिजली दरों में वृद्धि, भ्रष्टाचार के आरोप, कानून-व्यवस्था, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति और विभिन्न विभागों में भर्ती से जुड़े मुद्दों को जोर-शोर से उठाया था। माना जा रहा है कि इन मुद्दों की गूंज इस बार के पावस सत्र में भी सुनाई दे सकती है।
दूसरी ओर सरकार अपनी योजनाओं, विकास कार्यों और उपलब्धियों का ब्यौरा सदन में पेश कर सकती है। विशेष रूप से कृषि, अधोसंरचना विकास, उद्योग निवेश, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए कार्यों को सरकार विपक्ष के आरोपों के जवाब के तौर पर सामने रख सकती है। ऐसे में पांच दिवसीय यह सत्र राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
पिछले सत्र में उठे कई मुद्दों पर सरकार से जवाब की मांग भी इस बार देखने को मिल सकती है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने एजेंडे के साथ सदन में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में 13 से 17 जुलाई तक चलने वाला यह पावस सत्र प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सदन में कौन से मुद्दे सबसे ज्यादा चर्चा का केंद्र बनते हैं और सरकार-विपक्ष के बीच किस तरह की बहस देखने को मिलती है।
नीलम अहिरवार
17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।
