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जंतर-मंतर से सफदरगंज अस्पताल पहुंचे सोमन बांगचुक : बिगड़ती सेहत के बीच पुलिस ने उठाया कड़ा कदम, विपक्ष ने एक्शन को बताया लोकतंत्र पर हमला

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Jul 18, 2026
04:42 AM
बिगड़ती सेहत के बीच पुलिस ने उठाया कड़ा कदम, विपक्ष ने एक्शन को बताया लोकतंत्र पर हमला

नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की लगातार बिगड़ती सेहत को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस की कार्रवाई के दौरान अस्पताल और जंतर-मंतर दोनों जगह सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। वहीं, प्रदर्शन स्थल पर मौजूद समर्थकों को भी हटाया गया। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

सफदरजंग अस्पताल की मेडिकल टीम के अनुसार, लंबे समय तक उपवास और डिहाइड्रेशन के कारण सोनम वांगचुक बेहद कमजोर हो गए हैं। फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है, लेकिन उन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों ने बताया कि उनका ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर सामान्य से कम है, जबकि ईसीजी रिपोर्ट सामान्य आई है। शरीर के सभी जरूरी पैरामीटर्स को संतुलित रखने के लिए इलाज जारी है। अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि वांगचुक पूरी तरह होश में हैं और उनकी हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है।

इस बीच वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंग्मो ने अस्पताल पहुंचकर कहा कि परिवार और पिछले कई दिनों से उनकी देखभाल कर रहे डॉक्टरों की सहमति के बिना उन्हें किसी भी प्रकार का ओरल या इंट्रावेनस उपचार नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने उनके इलाज को लेकर पारदर्शिता बनाए रखने की भी मांग की।

दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में कहा कि यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों और मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह के अनुरूप की गई है। पुलिस के अनुसार, वांगचुक की लगातार गिरती सेहत को देखते हुए उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराना जरूरी हो गया था। हाईकोर्ट ने भी पहले सुनवाई के दौरान सरकारी डॉक्टरों से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे।

घटना के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया, जबकि शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया पर सरकार की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

गौरतलब है कि इससे पहले डॉक्टरों ने चेतावनी दी थी कि यदि वांगचुक की सेहत में जल्द सुधार नहीं हुआ तो उनके शरीर के अंग प्रभावित हो सकते हैं। शुक्रवार रात जारी अपने वीडियो संदेश में उन्होंने बताया था कि भूख हड़ताल के दौरान उनका लगभग 20 प्रतिशत वजन कम हो चुका है और मांसपेशियां भी प्रभावित हुई हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपना मनोबल मजबूत बताते हुए आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया था। अब उनकी सेहत और इस पूरे घटनाक्रम पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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