महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम तेज : प्रियंका गांधी का सरकार पर तीखा हमला, बोलीं परिसीमन का था मुद्दा

नई दिल्ली। महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन बिल के लोकसभा में पारित न हो पाने के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया है, वहीं कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।
वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि जिस बिल को महिला आरक्षण बताया जा रहा है, वह वास्तव में परिसीमन से जुड़ा हुआ था। उनके मुताबिक, “यह बिल महिलाओं को तत्काल आरक्षण देने के बजाय भविष्य में सीटों के पुनर्निर्धारण (परिसीमन) पर आधारित था।”
महिलाओं के नाम पर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है सरकार
प्रियंका गांधी ने यह भी सवाल उठाया कि बिल को इतनी जल्दबाजी में क्यों लाया गया और उसका मसौदा एक दिन पहले ही सार्वजनिक क्यों किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए महिलाओं के नाम पर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है।
उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में महिलाओं के साथ हुए अत्याचारोंकृजैसे मणिपुर और उन्नावकृपर सरकार की चुप्पी इस बात को दर्शाती है कि महिलाओं के मुद्दों पर उसकी प्रतिबद्धता वास्तविक नहीं है। “महिलाएं जागरूक हैं, उन्हें गुमराह नहीं किया जा सकता,” उन्होंने कहा।
सरकार की रणनीति को विपक्ष ने किया विफल
बीजेपी द्वारा विपक्ष पर लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि यदि यह बिल पारित हो जाता, तो सरकार इसका श्रेय लेती और यदि नहीं होता, तो विपक्ष को दोषी ठहराती। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष ने सरकार की “रणनीति” को विफल कर दिया है।
यह भी बोली प्रियंका
कांग्रेस ने मांग की है कि 2023 में सर्वसम्मति से पारित मूल महिला आरक्षण बिल को लागू किया जाए और आवश्यक संशोधन करके 2029 के आम चुनाव से महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। प्रियंका गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी इस दिशा में हर संभव समर्थन देने को तैयार है।
अंत में उन्होंने कहा कि देश की जनता महंगाई और अन्य मुद्दों से परेशान है और सरकार पर भरोसा कम हो रहा है। उनके अनुसार, आने वाले चुनावों में यह असंतोष साफ दिखाई देगा, चाहे आरक्षण लागू हो या नहीं।
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