20 साल इंतजार के बाद ग्रामीण ने खुद बनवा दिया पुल : 12 लाख रुपये खर्च कर पेश की मिसाल

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर में एक ग्रामीण ने शासन-प्रशासन की उदासीनता से परेशान होकर ऐसा काम कर दिखाया, जिसकी पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है। पिछले करीब 20 वर्षों से पुल निर्माण की मांग पूरी नहीं होने पर मैनपुर के स्टापडेम मोहल्ले निवासी और मुर्गा व्यवसायी लोचन चक्रधारी ने अपने निजी खर्च से लगभग 10 से 12 लाख रुपये लगाकर नदी पर पुल का निर्माण करा दिया।
आवागमन में होती है कठिनाई
मैनपुर नगर से होकर गुजरने वाली फुलझर नदी के उस पार ग्राम पंचायत मैनपुरकला के वार्ड क्रमांक-1 के लगभग 30 से 35 परिवार निवास करते हैं। बरसात के चार महीनों में इन परिवारों को आवागमन के लिए बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था। ग्रामीणों को जर्जर और करीब 20 फीट गहरे स्टापडेम को पार कर अपनी जान जोखिम में डालकर आना-जाना पड़ता था। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को होती थी।
प्रशासन ने नही दिया ध्यान
ग्रामीणों के अनुसार, कई बार पुल निर्माण की मांग को लेकर जनपद पंचायत, एसडीएम कार्यालय और कलेक्टर कार्यालय तक ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन वर्षों बाद भी कोई ठोस पहल नहीं हुई। बताया जाता है कि अतीत में दो ग्रामीण पानी के तेज बहाव में बह चुके हैं, जिससे लोगों में हमेशा डर का माहौल बना रहता था।
निजी खर्च से बनवाया पुल
इसी समस्या को देखते हुए लोचन चक्रधारी ने स्वयं आगे बढ़कर पुल निर्माण का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि लोगों की परेशानी और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कर्ज लेकर यह कार्य शुरू किया। पुल निर्माण में करीब 10 से 12 लाख रुपये खर्च हुए हैं और फिलहाल इसका काम अंतिम चरण में है। आगामी बारिश के मौसम में मोहल्ले के लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
समाज में पेश की मिशाल
ग्रामीणों और मोहल्ले के लोगों ने लोचन चक्रधारी के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कदम बताया है। लोगों का कहना है कि जब सरकारी तंत्र उनकी समस्या का समाधान नहीं कर सका, तब एक सामान्य ग्रामीण ने अपनी मेहनत की कमाई और कर्ज के सहारे पुल बनाकर मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल पेश की है।
पुल बनने के बाद प्रशासन पर उठे सवाल
क्षेत्र में अब यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर वर्षों से लंबित इस महत्वपूर्ण मांग की अनदेखी क्यों की गई और क्यों एक गरीब परिवार को कर्ज लेकर वह काम करना पड़ा, जो प्रशासन की जिम्मेदारी थी। फिलहाल लोचन चक्रधारी का यह प्रयास पूरे इलाके में चर्चा और प्रशंसा का विषय बना हुआ है।
आलोक त्रिपाठी
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