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कर्नाटक में ‘ब्रेकफास्ट पॉलिटिक्स’ तेज : सत्ता परिवर्तन की अटकलों ने पकड़ा जोर, क्या सिद्दारमैया छोड़ेंगे कुर्सी?

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May 27, 2026
07:41 AM
सत्ता परिवर्तन की अटकलों ने पकड़ा जोर, क्या सिद्दारमैया छोड़ेंगे कुर्सी?

बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार गुरुवार को मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ‘कावेरी’ में नाश्ते पर मुलाकात करेंगे। इस बैठक को राज्य में संभावित नेतृत्व परिवर्तन से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस आलाकमान जल्द ही सत्ता हस्तांतरण पर बड़ा फैसला ले सकता है।

डीके शिवकुमार के कार्यालय की ओर से जारी बयान में बताया गया कि वह गुरुवार सुबह नई दिल्ली से रवाना होकर सुबह 8ः30 बजे बेंगलुरु पहुंचेंगे। इसके बाद वह सीधे मुख्यमंत्री आवास पहुंचेंगे, जहां सुबह 9 बजे दोनों नेताओं के बीच अहम बैठक होगी। सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाकात के बाद दोनों नेता संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही चर्चाओं पर स्थिति साफ कर सकते हैं।

‘ब्रेकफास्ट डिप्लोमेसी’ पहले भी बटोर चुकी है सुर्खियां

यह पहली बार नहीं है जब सिद्दारमैया और शिवकुमार की ‘ब्रेकफास्ट मीटिंग’ चर्चा में आई हो। दिसंबर 2025 में भी दोनों नेताओं के बीच शिवकुमार के आवास पर इसी तरह की मुलाकात हुई थी। उस दौरान इडली, डोसा, कॉफी और पारंपरिक ‘नाटी कोली’ के साथ हुई बैठक ने खूब राजनीतिक सुर्खियां बटोरी थीं। तब भी कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद की अदला-बदली और सत्ता साझेदारी को लेकर चर्चाएं तेज थीं।

सुरजेवाला के दौरे ने बढ़ाई सियासी हलचल

इसी बीच कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक प्रभारी त्ंदकममच ैपदही ैनतरमूंसं भी बुधवार को बेंगलुरु पहुंच रहे हैं। आधिकारिक तौर पर उनके दौरे को ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण चुनाव की तैयारियों से जोड़ा जा रहा है, लेकिन राजनीतिक सूत्र इसे सत्ता परिवर्तन की कवायद से जोड़कर देख रहे हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व राज्य में किसी भी तरह की अंदरूनी कलह से बचते हुए नेतृत्व परिवर्तन को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा करना चाहता है।

राहुल गांधी की भूमिका पर चर्चाएं तेज

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सिद्दारमैया से पद छोड़ने का संकेत दिया है ताकि डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जा सके। बताया जा रहा है कि सिद्दारमैया इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख रखते हैं, क्योंकि उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री बनाने में राहुल गांधी की अहम भूमिका रही थी। हालांकि, सिद्दारमैया खेमे के कई मंत्री और समर्थक इस फैसले से सहमत नहीं हैं और चाहते हैं कि वह अपना कार्यकाल पूरा करें।

नए सत्ता समीकरण पर मंथन

राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्दारमैया को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव रखा है। साथ ही उनके बेटे यतींद्र सिद्दारमैया को उपमुख्यमंत्री बनाने और कुछ अहम मंत्रालय देने पर भी विचार किया जा रहा है। सामाजिक और जातीय संतुलन साधने के लिए राज्य में तीन या चार उपमुख्यमंत्री बनाने की संभावना भी जताई जा रही है। अब सबकी नजर गुरुवार की इस हाई-प्रोफाइल ‘ब्रेकफास्ट मीटिंग’ पर टिकी है, जो कर्नाटक की राजनीति की दिशा बदल सकती है।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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