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स्वामी चिन्मयानंद को याद कर भावुक हुए पीएम मोदी : चिन्मय अमृत महोत्सव में सुनाया 1983 की मुलाकात का किस्सा, युवाओं के लिए कही बड़ी बात

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Oct 23, 2026
07:18 AM
चिन्मय अमृत महोत्सव में सुनाया 1983 की मुलाकात का किस्सा, युवाओं के लिए कही बड़ी बात

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन का शुभारंभ किया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने चिन्मय मिशन के आध्यात्मिक योगदान की सराहना करते हुए स्वामी चिन्मयानंद के साथ अपनी पुरानी मुलाकात को याद किया। उन्होंने कहा गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद से मुलाकात के बाद लोगों ने मुझे गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया। तब से लेकर पिछले 25 वर्षों तक, मैंने सरकार के मुखिया के तौर पर अपनी पूरी क्षमता से देश की सेवा की है। गुरुदेव के स्नेह और आशीर्वाद का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री भावुक नजर आए।

‘चिन्मय मिशन केवल संस्था नहीं, एक विचार है’

प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि चिन्मय अमृत महोत्सव में शामिल होना उनके लिए एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव है। उन्होंने कहा कि मिशन की दशकों लंबी यात्रा आध्यात्मिक संकल्पों और भारतीय संस्कृति के मूल्यों से जुड़ी रही है। उनके मुताबिक, ‘चिन्मय’ का भाव अमरता और अमृत से जुड़ा है, इसलिए इस महोत्सव का नाम भी बेहद सार्थक है।

स्वामी चिन्मयानंद से मुलाकात को किया याद

पीएम मोदी ने फरवरी 1993 में बड़ौदा में स्वामी चिन्मयानंद से हुई मुलाकात का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उस समय वह स्वामीजी को अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म संसद के शताब्दी समारोह में आमंत्रित करने पहुंचे थे। यह आयोजन स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित होना था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरुदेव ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया था और अमेरिका में कार्यक्रमों के जरिए लोगों को इस ऐतिहासिक आयोजन के प्रति जागरूक करने की योजना बनाई थी। हालांकि, समारोह से कुछ सप्ताह पहले ही स्वामी चिन्मयानंद का अमेरिका में निधन हो गया।

शिकागो में महसूस हुई गुरुदेव की कमी

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि 11 सितंबर को शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद के शताब्दी समारोह में वह मौजूद थे। उस दौरान उन्हें और अन्य लोगों को गुरुदेव की कमी बहुत महसूस हुई। उन्होंने कहा कि स्वामीजी के साथ हुई आखिरी मुलाकात में हुई गंभीर चर्चा आज भी उन्हें याद है।

हमारी नीतियों के केन्द्र में देश के युवा

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, जब देश ने अपनी आजादी के 75 साल पूरे किए, तो मैंने सोचा कि हमें इस अवसर को न केवल विकसित भारत के विजन को प्रेरित करने का एक मंच बनाना चाहिए, बल्कि भारत की उस भावना को भी जीवंत करना चाहिए जो अमर विचारों के साथ जीना जानती है, और हजारों वर्षों के अपने अनुभव के आधार पर, आने वाली पीढ़ियों के लिए पूरी मानवता की चिंता कर सकती है। उन्होंने कहा कि मेरे प्रयासों और नीतियों के केंद्र में देश के युवा ही हैं। मुझे खुशी है कि चिन्मय अमृत महोत्सव में भी युवाओं ने बड़ी जिम्मेदारियां संभाली हैं।

हमारा ज्ञान और बोध अमर

उन्होंने कहा कि हमारा ज्ञान और बोध अमर है। इसी बोध के कारण भारत भी हजारों वर्षों से अमर बना हुआ है. क्योंकि भारत शब्द का अर्थ ही है जो ज्ञान और प्रकाश के अनुसंधान में लगा हो। उन्होंने कहा कि आज हम देख रहे हैं कि चिन्मय मिशन के 100 से ज्यादा शिक्षण संस्थान लाखों बच्चों का भविष्य निर्माण कर रहे हैं। उन्हें आधुनिक शिक्षा भी मिल रही है और वे भारतीय संस्कारों को भी आत्मसात कर रहे हैं। हमारी शिक्षा व्यवस्था नए भारत के हिसाब से हो इसके लिए हम नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लेकर आए हैं। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा, मातृभाषा में शिक्षा, आधुनिक विज्ञान और नई तकनीक को महत्व दिया गया है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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