ममता युग का अंत! : बंगाल की सत्ता पर शुभेंदु अधिकारी का कब्जा, अमित शाह ने पहनाया ‘सीएम का ताज’, विधायक दल की बैठक में लगी अंतिम मुहर

नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर सामने आया है। लंबे सियासी इंतजार के बाद आखिरकार बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल का नया मुख्यमंत्री घोषित कर दिया। कोलकाता में आयोजित बीजेपी विधायक दल की अहम बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में उनके नाम पर सर्वसम्मति से मुहर लगी। इसके साथ ही बंगाल में पहली बार बीजेपी सरकार बनने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
बैठक में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी मौजूद रहे। विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद शुभेंदु अधिकारी अब सरकार गठन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करेंगे। बताया जा रहा है कि वे शुक्रवार शाम 6:30 बजे राज्यपाल आर.एन. रवि से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।
9 मई को ऐतिहासिक शपथ ग्रहण
शुभेंदु अधिकारी 9 मई को सुबह 11 बजे कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। खास बात यह है कि इसी दिन रवींद्र जयंती भी मनाई जाती है, इसलिए बीजेपी इस शपथ ग्रहण समारोह को सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मान रही है।
समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह सहित कई बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक नई सरकार में दो डिप्टी सीएम बनाए जाने की भी चर्चा तेज है, जिससे बंगाल की राजनीति में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।
विधानसभा भंग, नई सरकार का रास्ता साफ
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.एन. रवि ने 7 मई को विधानसभा भंग करने की अधिसूचना जारी कर दी थी। इसके बाद से ही नई सरकार के गठन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। बीजेपी की भारी जीत के बाद यह फैसला लिया गया, जिसे पार्टी ऐतिहासिक जनादेश बता रही है।
‘28 हजार वोटों से जीते हमारे विधायक’
विधायक दल की बैठक को संबोधित करते हुए अमित शाह ने बीजेपी की जीत को “जनता का निर्णायक फैसला” बताया। उन्होंने कहा कि बंगाल में बीजेपी की लहर कितनी मजबूत थी, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी विधायकों की जीत का औसत 28 हजार वोट रहा।
‘श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना पूरा’
अमित शाह ने अपने भाषण में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को याद करते हुए कहा कि बंगाल में बीजेपी सरकार बनना उनके सपनों को साकार करने जैसा है। शाह ने कहा कि राष्ट्रवाद और विकास की जिस सोच को डॉ. मुखर्जी ने आगे बढ़ाया था, आज उसी विचारधारा की जीत हुई है। बंगाल की राजनीति में यह बदलाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य के राजनीतिक इतिहास का नया अध्याय माना जा रहा है।
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