मन की बात का 133वां एपिसोड : विज्ञान, पर्यावरण, ऊर्जा और वैश्विक शांति जैसे अहम मुद्दों पर की बात

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 133वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित किया। यह एपिसोड कई मायनों में खास रहा, क्योंकि इसमें विज्ञान, पर्यावरण, ऊर्जा और वैश्विक शांति जैसे अहम मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। इस दौरान उन्होंने जनगणना का भी जिक्र किया। पीएम मोदी के संबोधन की खास बातें
वैज्ञानिक उपलब्धियों पर गर्व
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत भारत की वैज्ञानिक प्रगति के उल्लेख से की। उन्होंने देश के परमाणु वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि भारत आज आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में हो रही प्रगति को उन्होंने “नए भारत की पहचान” बताया।
जनगणना में आपकी भागीदारी आसान
जनगणना अभियान को लेकर पीएम मोदी ने जानकारी देते हुए बताया कि- जिन राज्यों में स्व-गणना का काम पूरा हो गया है, वहां घरों की लिस्टिंग का काम जारी है। अब तक लगभग 1 करोड़ 20 लाख परिवारों के मकान की लिस्टिंग का काम पूरा भी हो चुका है। वही आप घर बैठे भी अपनी जानकारी डिजिटली भर सकते है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद आपके मोबाइल या ईमेल पर आपको एक विशेष आईडी मिलेगी, जिसे दिखाकर आप जानकारी की पुष्टि कर सकते हैं।
शांति और मानवता का संदेश
वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री ने गौतम बुद्ध के विचारों का उल्लेख करते हुए शांति, धैर्य और सह-अस्तित्व का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में बुद्ध का मार्ग पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मई के महीने की शुरुआत एक पावन अवसर के साथ होने जा रही है। कुछ ही दिनों में हम बुद्ध पूर्णिमा मनाएंगे। भगवान गौतम बुद्ध का जीवन संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने हमें सिखाया है कि शांति हमारे भीतर से शुरु होती है, उन्होंने बताया है कि स्वयं पर विजय सबसे बड़ी विजय होती है।
पर्यावरण संरक्षण पर फोकस
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण को अहम बताते हुए देश के विभिन्न हिस्सों में चल रहे संरक्षण प्रयासों की सराहना की। इसके साथ ही उन्होने नागरिकों से प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने की अपील की। पीएम ने आगे कहा कि कच्छ के रण में बरसात खत्म होते ही हर साल लाखों फ्लेमिंगो यहां आते हैं। पूरा इलाका गुलाबी रंग से रंग जाता है, इसलिए इसे 'Flamingo City' कहा जाता है। कच्छ के लोग इन्हें 'लाखा जी के बाराती' कहते हैं। लाखा जी के ये बाराती कच्छ में पर्यावरण संरक्षण के बड़े सुंदर प्रतीक बन गए हैं।
हरित ऊर्जा की ओर बढ़ता भारत
कार्यक्रम में पीएम मोदी ने पवन ऊर्जा को “अदृश्य शक्ति” बताते हुए कहा कि भारत इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति बना चुका है। उन्होंने नागरिकों और उद्योगों से अपील की कि वे स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें। भारत ने हाल ही में पवन-ऊर्जा यानि विंड एनर्जी में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अब भारत का विंड एनर्जी जनरेशन कैपेसिटी 56 गीगावॉट से अधिक हो चुकी है। पिछले एक साल में ही करीब 6 गीगावॉट नई क्षमता जुड़ी है। विंड एनर्जी में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है।
भारत के विकास के लिए पवन ऊर्जा जरूरी
गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान देश के अनेक राज्य इस सेक्टर में अपना परचम लहरा रहे हैं। गुजरात के कच्छ, पाटन, बनासकांठा जैसे क्षेत्र जहां पहले सिर्फ रेगिस्तान नजर आता था। आज वहां बड़े रिन्यूएबल एनर्जी पार्क बन रहे हैं। इसका लाभ युवाओं को मिल रहा है, नए अवसर बन रहे हैं, नई स्किल्स विकसित हो रही हैं, रोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं।
अभिलाषा कनाडे
खबरी दुनिया की ऑल राउंडर। टीवी जर्नलिज़्म में एक दशक का सफर पूरा कर रही हैं। टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया का प्रगाढ़ अनुभव।
