महिला आरक्षणः : नारी! तुम केवल मुद्दा हो

गणेश साकल्ले
हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर जयशंकर प्रसाद ने महिलाओं के गौरव, करुणा और श्रद्धा रूप को रेखांकित करती एक पंक्ति लिखी थी नारी! तुभ केवल श्रद्धा हो। कालांतर में सियासतदाओं के लिए यह व्याख्या अब नारी तुम केवल मुद्दा होकर रह गई है। चाहे घरेलू हिंसा हो अथवा दहेज हत्या हो। कन्या भ्रूण हत्या का मामला हो या कार्यस्थल पर प्रताड़ना की बात हो। प्रायः हर जगह राजनेता उन घटनाओं को महिला बोट बैंक की दृष्टि से ही देखते आ रहे हैं।
महिला वोट बैंक पर सभी राजनीतिक दलों की नजरें हैं। इसी के चलते लोकसभा का विशेष सत्र बुलाया गया, जिसमें वर्ष 2011 की जनगणना के हिसाब से वर्ष 2029 से महिलाओं को लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं में 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए तीन संशोधन विधेयक लाए गए थे, जो दो तिहाई बहुमत न मिलने के कारण गिर गए।
महिलाओं की बढ़ती ताकत को सबसे पहले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवाराज सिंह चैहान ने पहचाना था। इसीलिए उन्होंने महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाएं बनाकर सीधे उन्हें लाभान्वित किया। यह प्रयोग इतना सफल रहा कि जिस-जिस राज्य ने महिला वोट बैंक पर फोकस किया, वह सत्ता की सीढ़ी चढ़ गया। इतना ही नहीं मध्यप्रदेश में लाडली लक्ष्मी, कन्या दान, लाडली बहना समेत अनेक योजनाएं बालिकाओं और महिलाओं को केन्द्र में रखकर जमीन पर उतारी गईं हैं। इस तरह राज्य की भाजपा सरकार ने महिला वोट बैंक को अपनी राजनीतिक पूंजी बना लिया है।
समझा जाता है कि इस ताकतवर होते वोट बैंक की खातिर ही केंद्र की भाजपा नीति सरकार ने नारी वंदन नामक ब्लाक बस्टर फिल्म की पटकथा तैयार की थी। इसकी नायिका पूरे देश की महिला शक्ति थी। हालांकि इस कहानी पर बहुत लोगों ने काम किया। लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को रिजर्वेशन देने की कवायद करीब चार दशक से चली आ रही है। पंचायतों और नगरीय निकायों में महिलाओं को रिजर्वेशन देने की पहल संविधान में संशोधन कर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने की थी। इसके बाद संसद में महिला आरक्षण विधेयक पहली बार वर्ष 1996 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा लेकर आए थे। फिर अपने कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपी ने भी महिलाओं को आरक्षण देने की कोशिश की थी। इसके बाद डॉ. मनमोहन सिंह की मंशा भी लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने की थी। किन्तु कतिपय विरोध के चलते मामला टलता रहा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महिला रोट बैंक के बढ़ते वजन को भांपकर वर्ष 2023 में संसद के दोनों सदनों से महिला आरक्षण विधेयक पारित करा लिया है। अभी नारी वंदन 2023 कानून लागू है और उसमें प्रावधान है कि 33 फीसदी महिला आरक्षण अगली जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के आधार पर लागू होगा। ऐसे में माना जा रहा है कि अब 2034 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिलना मुश्किल है।
इस तरह अगले 8 साल तक राजनीति के केन्द्र में युवाओं के साथ महिला शक्ति ही रहेगी। सभी राजनीतिक दलों के घोषणा पत्र में नारी ही मुद्दा रहेगी। भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दल खुद को महिला हितैषी और संसद में मुखालफत करने वाले दलों को महिला विरोधी करार देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे।
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