भारत में शतरंज की नई 'क्वीन' : आर. वैशाली ने रचा इतिहास, विमेंस कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतकर बनीं पहली भारतीय महिला

भारतीय शतरंज के लिए 15 अप्रैल 2026 की तारीख स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गई है। साइप्रस के कैप सेंट जॉर्ज होटल एंड रिसॉर्ट में आयोजित FIDE विमेंस कैंडिडेट्स टूर्नामेंट 2026 के फाइनल राउंड में 24 वर्षीय वैशाली रमेशबाबू ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इस खिताबी जीत के साथ ही वैशाली यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं।
विश्व चैंपियनशिप में चीन के दबदबे को चुनौती
वैशाली की इस जीत ने न केवल उन्हें चैंपियन बनाया है, बल्कि अब उनके पास वर्ल्ड शतरंज चैंपियनशिप में मौजूदा चैंपियन जू वेनजुन (Ju Wenjun) को चुनौती देने का अधिकार भी मिल गया है। यह मुकाबला इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले एक दशक (2016) से महिला शतरंज की विश्व चैंपियनशिप पर चीनी खिलाड़ियों का एकतरफा कब्जा रहा है। वैशाली पिछले 10 सालों में पहली ऐसी गैर-चीनी खिलाड़ी हैं जो इस वर्चस्व को तोड़ने के बेहद करीब हैं।
धीमी शुरुआत के बाद शानदार वापसी
शुरूआत में वैशाली टूर्नामेंट में सबसे कम रेटिंग वाली खिलाड़ी थीं। पहले चार मुकाबले ड्रॉ रहे और पांचवें में हार मिली। इसके बाद उन्होंने लगातार बेहतर खेल दिखाते हुए वापसी की और खिताब अपने नाम कर लिया।
गुकेश की राह पर वैशाली, क्या दोहराया जाएगा इतिहास?
खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों के बीच अब वैशाली की तुलना डी. गुकेश से की जा रही है। याद दिला दें कि 2024 में गुकेश ने चीन के ही डिंग लिरेन को हराकर विश्व चैंपियन का खिताब जीता था। अब ठीक दो साल बाद, 2026 में वैशाली के पास वही कारनामा दोहराने का मौका है। अगर वह जू वेनजुन को हरा देती हैं, तो भारत के पास पुरुष और महिला दोनों वर्गों में विश्व चैंपियन का खिताब होगा।

शतरंज की 'वंडर सिबलिंग्स' हैं प्रज्ञानंद और वैशाली
आर. वैशाली की यह सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह दुनिया की सबसे प्रतिभाशाली 'चेस भाई-बहन' की जोड़ी की कहानी का एक नया अध्याय है। वैशाली के छोटे भाई आर. प्रज्ञानंद वही खिलाड़ी हैं जिन्होंने बहुत कम उम्र में दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को हराकर तहलका मचा दिया था। यह दुनिया की पहली ऐसी भाई-बहन की जोड़ी है, जिसने एक साथ ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल किया और अब दोनों ने ही कैंडिडेट्स जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में अपनी धाक जमाई है। जहां प्रज्ञानंद ने पुरुषों के वर्ग में भारतीय शतरंज को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया, वहीं अब उनकी बड़ी बहन वैशाली ने महिला वर्ग में इतिहास रचकर यह साबित कर दिया है कि शतरंज का भविष्य इस भारतीय परिवार के हाथों में सुरक्षित है।
वैशाली की इस उपलब्धि के मुख्य बिंदु
पहली भारतीय महिला: कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतने वाली भारत की पहली महिला ग्रैंडमास्टर।
ऐतिहासिक जीत: साइप्रस के कड़े मुकाबले में दुनिया की दिग्गज खिलाड़ियों को पछाड़कर खिताब अपने नाम किया।
चीन बनाम भारत: विमेंस वर्ल्ड चैंपियनशिप में 10 साल बाद चीन को किसी भारतीय से कड़ी चुनौती मिलेगी।
भाई-बहन की जोड़ी का कमाल: वैशाली और उनके भाई आर. प्रज्ञानंद ने पहले ही दुनिया को अपनी प्रतिभा से चौंकाया है, और अब वैशाली ने व्यक्तिगत तौर पर एक नया शिखर छुआ है।
जू वेनजुन से महामुकाबला
अब पूरी दुनिया की नजरें आगामी विश्व चैंपियनशिप पर टिकी हैं। वैशाली की आक्रामक खेल शैली और हालिया फॉर्म को देखते हुए शतरंज विशेषज्ञों का मानना है कि जू वेनजुन के लिए अपना टाइटल बचाना आसान नहीं होगा। भारत की इस 'चेस क्वीन' से देश को उम्मीद है कि वह 2026 में तिरंगा एक बार फिर विश्व पटल पर लहराएंगी।
खुशी राज
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