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महज 8 दिन में ही संजू के सामने नतमस्तक हुए सूर्या : वेस्टइंडीज के खिलाफ टीम इंडिया के निए नायक बनकर उभरे थे सैमसन

admin

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Mar 02, 2026
01:10 PM
वेस्टइंडीज के खिलाफ टीम इंडिया के निए नायक बनकर उभरे थे सैमसन

कोलकाता। भारत और वेस्टइंडीज के बीच रविवार को टी20 विश्व कप 2026 का आखिरी सुपर-8 मुकाबला खेला गया। टीम इंडिया ने वेस्टइंडीज को 5 विकेट से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली। भारतीय टीम की जीत में सबसे बड़ी भूमिका विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन की रही। सैमसन मैच में टीम इंडिया के लिए नायक बनकर उभरे।

भारतीय टीम को मैच जिताने के बाद संजू सैमसन जब पवेलियन की तरफ लौटे तो कप्तान सूर्यकुमार यादव को उनके सामने नतमस्तक होना पड़ा। मैच से आठ दिन पहले हुए प्रेस कांफ्रेंस में संजू सैमसन को लेकर सूर्यकुमार का ऐसा बर्ताव नहीं था, लेकिन 8 दिन में ही संजू ने कप्तान को अपने सामने नतमस्तक होने पर मजबूर कर दिया। आइए पूरी कहानी समझते हैं।

विश्व कप की शुरुआत से भारत बतौर ओपनिंग बल्लेबाज ईशान किशन और अभिषेक शर्मा के साथ खेल रही थी। अभिषेक शर्मा ग्रुप स्टेज में पूरी तरह फ्लॉप रहे थे और लगातार तीन मैचों में शून्य पर आउट हुए थे। उनकी बीमारी की वजह से नामीबिया के खिलाफ संजू को मौका मिला था। उन्होंने 8 गेंद पर 22 रन बनाए थे, लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ अगले मैच में फिर से संजू को ड्रॉप कर अभिषेक को प्लेइंग इलेवन में जगह दी गई और अभिषेक पाकिस्तान वाले मैच में शून्य पर आउट हुए।

पीसी में संजू को लेकर यह बोले थे सूर्या

भारतीय टीम का सुपर-8 का पहला मैच दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 22 फरवरी को था। मैच से एक दिन पहले प्रेस कांफ्रेंस में सूर्यकुमार यादव से पत्रकारों ने सवाल किया कि कई बल्लेबाज अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे, तो क्या संजू सैमसन को प्लेइंग इलेवन में जगह मिल सकती है? इसके जवाब में सूर्यकुमार यादव ने हंसते हुए कहा था कि क्या आप चाहते हैं कि मैं संजू को अभिषेक शर्मा या तिलक वर्मा की जगह खिलाऊं? संजू को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में मौका नहीं मिला। इस मैच में अभिषेक, तिलक और रिंकू का बल्ला नहीं चला और टीम इंडिया हार गई। टीम इंडिया के लिए सेमीफाइनल की राह मुश्किल हो गई।

सैमसन ने जिम्बाब्वे के खिलाफ खेली प्रभावी प्रारी

भारत का 26 फरवरी को जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरा सुपर-8 मैच था, जिसमें जीत जरूरी थी। टीम में बदलाव की चर्चा थी। रिंकू सिंह अपने बीमार पिता को देखने के लिए अस्पताल पहुंचे थे। उनकी जगह सैमसन को टीम में लाया गया और ओपनिंग कराई गई। सैमसन ने 15 गेंद पर 24 रन बनाए। यह पारी छोटी लेकिन प्रभावी थी और भारतीय टीम इसी शुरुआत के दम पर जिम्बाब्वे के खिलाफ बड़ा स्कोर बनाकर जीत हासिल कर पाई। इसके बाद संजू का प्लेइंग इलेवन में रहना तय हो गया था।

तो भारत का सेमीफाइनल में पहुंचना होता मुश्किल

1 मार्च को वेस्टइंडीज के खिलाफ हुए मैच में भारत के पास जीत एकमात्र विकल्प थी, नहीं तो विश्व कप से बाहर होना पड़ता। वेस्टइंडीज ने भारतीय टीम को 196 रन का लक्ष्य दिया था। लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने एक-एक कर अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, सूर्यकुमार यादव, तिलक वर्मा और हार्दिक पांड्या के विकेट गंवा दिए, लेकिन जो पारी की शुरुआत से ही क्रीज पर खड़ा था और तूफानी अंदाज में रन बना रहा था, वह थे संजू सैमसन। सैमसन ने 50 गेंद पर 12 चैकों और 4 छक्कों की मदद से नाबाद 97 रन की पारी खेल भारत का स्कोर 19.2 ओवर में 5 विकेट पर 199 पर पहुंचाकर 5 विकेट से जीत दिला दी। संजू ने बैक टू बैक छक्का और चैका लगाकर टीम को जीत और सेमीफाइनल का टिकट दिलाया। सैमसन अगर क्रीज पर नहीं रुके होते, तो भारत का सेमीफाइनल में पहुंचना मुश्किल था।

महज आठ दिन में ही बदल गए सूर्या के तवर

यही वजह रही कि जब टीम को जीत दिलाकर संजू पवेलियन की तरफ लौटे तो कप्तान सूर्यकुमार यादव ने अपनी टोपी हटाकर और सर झुकाकर हंसते हुए उनका अभिवादन किया। महज 8 दिन के अंदर सैमसन ने अपने प्रदर्शन के दम पर कप्तान को अपने सम्मान में झुकने पर मजबूर कर दिया।

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