धूप में तड़पता बच्चा, सिस्टम बेखबर! : मां भीगी चुन्नी से बचाती रही, पिता खींचता रहा स्ट्रेचर

इंदौर के सबसे बड़े एमवाय अस्पताल में व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए है। एमवाय अस्पताल से सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में रेफर किए एक बच्चे को उसके परिजन कड़ी धूप में खुद ही स्ट्रेचर से ले जाते दिखे। एमवाय अस्पताल और सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में करीब एक किलोमीटर का दूरी है। इस दौरान बच्चे की मां बच्चे को धूप से बचाने के लिए बार-बार भीगी चुन्नी ओढ़ाती रही, तो वही पिता बच्चे का स्ट्रेचर खींचते नजर आए। एमवाय अस्पताल की लापरवाही की से तस्वीर स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं की पोल खोलती नजर आई जिसने पूरे अस्पताल सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए।
धूप से बचाने के लिए भीगी चुन्नी ओढ़ाती रही मां
मामला एमवाय अस्पताल का है, जहां 12 साल के आर्दश को रीढ़ की हड्डी में समस्या के चलते अस्पताल में भर्ती कराया था। एमवाय के डॉक्टर ने बच्चे को सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल रेफर किया था। जिसके लिए परिजनों को भीषण गर्मी में खुद स्ट्रेचर पर धकेलते हुए करीब 1 किलोमीटर तक ले जाना पड़ा। इस दौरान मां अपने बेटे को धूप से बचाने के लिए बार-बार पानी से चुन्नी भिगोकर उसके ऊपर डालती रही। इसी के साथ परिजनों ने ये भी आरोप लगाया कि जब वे बच्चे को लेकर सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल पहुंचे तो वहा उन्हे कहा गया कि बच्चे को भर्ती करने की जरूरत नहीं है, सिर्फ मेडिकल फाइल और दस्तावेज देखने हैं। इस प्रक्रिया में परिवार को दोबारा बच्चे को स्ट्रेचर पर लेकर एमवाय अस्पताल लौटना पड़ा।

भारी खर्च के बावजूद बदइंतजामी बरकरार
अस्पतालों में मरीजों को वार्ड, जांच या दूसरे अस्पताल तक ले जाने का काम आउटसोर्स कर्मचारियों को सौंपा गया है। लेकिन आरोप है कि जरूरत के समय स्ट्रेचर और व्हीलचेयर नहीं मिलते, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी उठानी पड़ती है। हर महीने इस व्यवस्था पर करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद ऐसी घटनाएं लगातार सिस्टम की खामियां उजागर कर रही हैं।
व्यवस्था की सच्चाई उजागर
भीषण गर्मी में मां भीगी चुन्नी से बच्चे को राहत देने की कोशिश करती रही, जबकि पिता खुद स्ट्रेचर धक्का देकर अस्पताल तक पहुंचे। यह दृश्य अस्पतालों में मरीजों और परिजनों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है। करोड़ों रुपये खर्च करने के दावों के बावजूद, जब मरीजों को खुद ही सहारा बनना पड़े, तो व्यवस्था की असल तस्वीर सामने आ जाती है।
क्या होगी कार्रवाई?
यह घटना सरकारी अस्पतालों में स्ट्रेचर, व्हीलचेयर, सहायक स्टाफ और मरीज परिवहन जैसी जरूरी सुविधाओं की कमी को फिर उजागर करती है। अब देखना है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और हालात सुधारने के लिए कितनी गंभीरता दिखाते हैं।
अभिलाषा कनाडे
खबरी दुनिया की ऑल राउंडर। टीवी जर्नलिज़्म में एक दशक का सफर पूरा कर रही हैं। टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया का प्रगाढ़ अनुभव।
