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बामुलाहिजा : तीसरी सीट, सबसे बड़ा खेल

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jun 09, 2026
08:21 AM
तीसरी सीट, सबसे बड़ा खेल

- संदीप भम्मरकर

सियासत में असली चाल वही, जो चलने के बाद समझ आए। राज्यसभा की तीसरी सीट पर उम्मीदवार उतारकर सीएम मोहन यादव ने ऐसा मास्टर स्ट्रोक वाला दांव चला कि भोपाल से दिल्ली तक हलचल मच गई। कांग्रेस ने फौरन बाड़ेबंदी तेज कर दी और खरीद-फरोख्त के आरोपों की झड़ी लगा दी। उधर बीजेपी खेमे में मुस्कुराहट बरकरार है। दिलचस्प यह भी कि एक रात पहले हेमंत खंडेलवाल कह रहे थे कि तीसरी सीट में कोई दिलचस्पी नहीं! अब गलियारों में चर्चा है, “बयान रणनीति था या रणनीति के लिए बयान?

सीट बचाओ, कुर्सी बचाओ

राज्यसभा की जंग अब सिर्फ वोटों की नहीं, कुर्सियों की भी हो गई है। बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट के मैदान में उतरते ही औपचारिक माना जा रहा चुनाव अचानक हाई वोल्टेज मुकाबले में बदल गया है। अब मतदान भी अहम है और नतीजे का दिन भी। कांग्रेस की सीट बचाने का जिम्मा जीतू पटवारी और उमंग सिंघार पर है। आलाकमान पहले ही तोड़फोड़ को लेकर चेतावनी दे चुका है। इसलिए गलियारों में चर्चा है कि अगर वोटों का गणित गड़बड़ाया, तो झटका सिर्फ राज्यसभा तक सीमित नहीं रहेगा। सीट फिसली तो कई कुर्सियों के पेंच भी ढीले पड़ सकते हैं।

सिंधिया खेमे में घटा-जोड़

मंत्रिमंडल की शतरंज में मोहरे मुस्कुरा रहे हैं, लेकिन चालें बेचैन कर रही हैं। फिलहाल विस्तार भले टल गया हो, मगर सत्ता के गलियारों में फेरबदल की फुसफुसाहट तेज है। चर्चा है कि इस बार परफॉर्मेंस को पैमाना बनाकर कांट-छांट होगी। सबसे ज्यादा निगाहें सिंधिया खेमे पर टिकी हैं। कहा जा रहा है कि जितने मंत्री बाहर होंगे, उतने ही नए चेहरे इसी खेमे से जोड़े भी जा सकते हैं। भई, इस खेमे के कई दिग्गज फिलहाल बड़े सरकारी बंगलों तक ही सीमित हैं, उन्हें मंत्री की कुर्सी नहीं मिली है। उधर, कुछ पुराने दिग्गजों की कुर्सियां भी डगमगाती दिख रही हैं। गलियारों में सवाल गूंज रहा है, घटाव ज्यादा होगा या जोड़ का हिसाब भारी पड़ेगा?

गमछा-झोला, ट्रांसफर कनेक्शन!

भोपाल में इन दिनों गमछे और झोले भी बहुत कुछ कह रहे हैं। तबादलों के दरवाजे खुलते ही जरूरतमंदों की राजधानी दौड़ शुरू हो गई है। दिग्विजय दौर जैसी होटलों की कमी पड़ने वाली भीड़ भले न हो, लेकिन मंत्रियों के बंगलों पर मेला जरूर लगा है। खास बात यह कि कुछ बंगलों पर गमछा और झोला थामे चेहरों की कतार सबसे लंबी दिखाई दे रही है। वजह भी सब समझते हैं। ट्रांसफर का ‘शॉर्टकट फॉर्मूला’ अब किसी से छिपा नहीं। सब जानते हैं कि फाइल तब चलती है, जब बंगले का रास्ता तय होता है।

एक लेडी, कई अफसर परेशान

सियासत और अफसरशाही में खबर से ज्यादा उसका साया डराता है। ऐसे ही एक लेडी की शिकायतों और आरोपों ने कुछ अफसरों की नींद उड़ा रखी है। चर्चा है कि निशाने पर सिर्फ विवादित छवि वाले अफसर ही नहीं, बल्कि कुछ साफ-सुथरी छवि के अधिकारी भी आ गए हैं। आरोप इतने संवेदनशील हैं कि चर्चा की गुंजाइश भी नहीं है। लेकिन नामों की खोज और दावों की पड़ताल लगातार जारी है। कुछ चैंबरों में इस बात की खोजबीन तेज हैं कि आखिर वो लेडी है कौन?

भोपाल और इंदौर पुलिस के राज़

बीते दिनों हुए दो हाई प्रोफाइल मामलों में बड़े लोगों के राज़ भोपाल और इंदौर पुलिस के पास हैं। त्विषा शर्मा केस को लेकर भोपाल पुलिस के सीने में ये राज़ दफन है कि तीन दिन तक एफआईआर को रोकने वाले लोग कौन थे? मामले की तफ्तीश में जुटी सीबीआई की जांच का प्रमुख बिंदू यही है। उधर, इंदौर पुलिस भी हनीट्रैप 2.0 के केस में उलझी हैं। जहां इस बात का ज़िक्र है कि कई सीडी में कई अफसरों की वीडियोज़ हैं। ये अफसर कौन हैं, ये केवल इंदौर पुलिस ही जानती है। जो इंदौर पुलिस की तिजोरी में संभवत: सुरक्षित होंगे ही। वैसे, इस बात की संभावना भी बेहद कम ही है कि इन अफसरों के राज़ कभी खुलेंगे। क्योंकि कुछ फाइलें बंद नहीं होतीं, बस और धूल खाती फाइलों के ढेर में दबा दी जाती हैं।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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