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लोकसभाः एंटी-पेपर लीक बिल पर गर्मागर्म बहस शुरू : विपक्ष की मांग पर 10 घंटे तक होगी मैराथन चर्चा, कड़े प्रावधानों वाला है विधेयक

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 28, 2026
10:13 AM
विपक्ष की मांग पर 10 घंटे तक होगी मैराथन चर्चा, कड़े प्रावधानों वाला है विधेयक

नई दिल्ली। देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से लाए गए एंटी-पेपर लीक विधेयक पर मंगलवार को लोकसभा में लंबी चर्चा शुरू हुई। मानसून सत्र के दौरान पहले इस विधेयक पर छह घंटे बहस का समय तय किया गया था, लेकिन विपक्ष की मांग पर सरकार ने चर्चा की अवधि बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की सहमति से इस महत्वपूर्ण विधेयक पर 10 घंटे तक चर्चा कराने की घोषणा की।

लोकसभा अध्यक्ष बोले- बेहतर कानून बनाना सभी की जिम्मेदारी

कार्यवाही शुरू होने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि यह संतोष की बात है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों इस महत्वपूर्ण विधेयक पर विस्तृत चर्चा के लिए सहमत हैं। उन्होंने कहा कि लोक परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता केवल छात्रों का नहीं, बल्कि पूरे देश का विषय है। उन्होंने सभी सांसदों से आग्रह किया कि वे अपने सुझाव रखें ताकि ऐसा प्रभावी कानून तैयार हो सके, जो परीक्षा प्रणाली में जनता का भरोसा और मजबूत करे।

विपक्ष ने उठाई प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की अनुपस्थिति की बात

विधेयक पर चर्चा शुरू होते ही कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की सदन में अनुपस्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी अपेक्षित थी। विपक्षी दलों ने यह भी मांग की कि इस विषय की गंभीरता को देखते हुए चर्चा के लिए अधिक समय दिया जाए।

सरकार ने कहा- 10 घंटे बहस के लिए पूरी तरह तैयार

विपक्ष की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकार विस्तृत चर्चा से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि शुरुआत में सभी दल छह घंटे की चर्चा पर सहमत थे, बाद में इसे आठ घंटे किया गया और अब यदि विपक्ष और समय चाहता है तो सरकार 10 घंटे तक बहस कराने के लिए तैयार है। इसके बाद सदन ने सर्वसम्मति से चर्चा की अवधि बढ़ाने पर सहमति दे दी।

कड़े प्रावधानों वाला है नया विधेयक

एंटी-पेपर लीक विधेयक को सोमवार को केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में पेश किया था। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

विधेयक में पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के मामलों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष तक की सजा, 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना, अवैध रूप से अर्जित संपत्ति की जब्ती तथा मामलों का तीन माह के भीतर निपटारा सुनिश्चित करने जैसी व्यवस्थाएं प्रस्तावित की गई हैं।

युवाओं की उम्मीदों से जुड़ा है कानून

हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में सरकार इस विधेयक को परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष कानून के प्रावधानों, जवाबदेही और उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की मांग कर रहा है।

लोकसभा में शुरू हुई यह लंबी बहस अब केवल एक विधेयक तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों विद्यार्थियों की उम्मीदों, निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने से भी जुड़ी हुई मानी जा रही है। सदन में होने वाली चर्चा और सदस्यों के सुझावों के बाद इस विधेयक के अंतिम स्वरूप पर सभी की नजरें टिकी हैं।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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