रोमांस या छेड़छाड़? : 90 के दशक की फिल्मों पर मधु का बड़ा हमला, बोलीं- आज होता तो हीरो जाता जेल

मुंबई। फिल्मों में महिलाओं की प्रस्तुति को लेकर छिड़ी नई बहस के बीच 90 के दशक की चर्चित अभिनेत्री मुध ने उस दौर के सिनेमा पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जिन दृश्यों को कभी रोमांस और प्यार का प्रतीक माना जाता था, आज उन्हें छेड़छाड़ और उत्पीड़न की श्रेणी में रखा जाएगा। उनके मुताबिक समाज की सोच बदलने के साथ फिल्मों का नजरिया भी बदलना जरूरी है।
एक इंटरव्यू में मधु ने अपनी सुपरहिट फिल्म फूल और कांटे का उदाहरण देते हुए कहा कि फिल्म में नायक और उसके दोस्त कॉलेज में लड़की का पीछा करते हैं, उसे परेशान करते हैं और सीटियां बजाते हैं। उस समय इन दृश्यों को रोमांटिक माना गया था, लेकिन आज ऐसी हरकतों को समाज स्वीकार नहीं करेगा।
“आज वही हीरो जेल में होता”
मधु ने कहा कि फिल्म में उनका किरदार आखिरकार उसी युवक से प्रेम करने लगता है जो लगातार उसे परेशान करता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर आज कोई युवक सार्वजनिक स्थान पर किसी लड़की के साथ ऐसा व्यवहार करे तो उसे छेड़छाड़ माना जाएगा और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

अभिनेत्री ने कहा कि उस दौर में किसी ने यह सवाल नहीं उठाया कि फिल्म गलत संदेश दे रही है। इसके उलट दर्शकों ने फिल्म को हाथोंहाथ लिया और यह बड़ी हिट साबित हुई। लेकिन अब समय बदल चुका है और दर्शक पहले की तुलना में कहीं अधिक जागरूक हो गए हैं।
रेप सीन पर भी बदली सोच
मधु ने 80 और 90 के दशक की फिल्मों का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय लगभग हर दूसरी फिल्म में रेप सीन देखने को मिल जाते थे। तब इन दृश्यों को लेकर ज्यादा बहस नहीं होती थी, लेकिन आज ऐसे विषयों को बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ पेश किया जाता है।
“समाज बदलता है तो सिनेमा भी बदलता है”
मधु का मानना है कि सिनेमा हमेशा समाज का आईना होता है। जैसे-जैसे लोगों में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ी है, वैसे-वैसे फिल्मों की कहानियों और किरदारों में भी बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि आज का दर्शक सिर्फ मनोरंजन नहीं चाहता, बल्कि यह भी देखता है कि पर्दे पर दिखाया जा रहा संदेश समाज के लिए कितना जिम्मेदार है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
