जिस किरदार को दिल से मांगा, वही मिल गया! : विधात्री बंदी की ‘कैरोल’ तक पहुंचने की कहानी है बेहद खास

मुंबई। अभिनेत्री विधात्री बंदी इन दिनों अपनी फीचर फिल्म ‘मैक्स, मिन और मियोज्स्की’ में निभाए गए कैरोल सेक्वेराका के किरदार को लेकर चर्चा में हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस भूमिका के लिए उन्होंने शुरुआत से ऑडिशन नहीं दिया था। वह फिल्म में ‘मिन’ का किरदार हासिल करने के इरादे से ऑडिशन देने पहुंची थीं, लेकिन कहानी का सार पढ़ते ही उनका ध्यान कैरोल की ओर चला गया। विधात्री ने बताया कि कैरोल का किरदार जिस तरह लिखा गया था, उससे वह तुरंत जुड़ गईं। उन्होंने मन ही मन तय कर लिया था कि अगर इस भूमिका के लिए मौका मिला तो वह जरूर कोशिश करेंगी। उन्होंने यह इच्छा किसी से साझा भी नहीं की।
दो दिन बाद आया वही फोन, जिसका इंतजार था
अभिनेत्री के मुताबिक, ऑडिशन देने के महज दो दिन बाद कास्टिंग टीम का फोन आया। उन्हें बताया गया कि निर्देशक चाहते हैं कि वह कैरोल के किरदार के लिए ऑडिशन दें। विधात्री ने ऑडिशन दिया और उनका चयन तुरंत हो गया। इसके बाद निर्देशक पैडी ने उन्हें फिल्म की पूरी कहानी सुनाई। कहानी सुनते वक्त अभिनेत्री इतनी भावुक हो गईं कि उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। उन्होंने बताया कि अजनबियों के सामने इस तरह भावुक होना उनके लिए असामान्य अनुभव था। उसी पल उन्हें महसूस हुआ कि यह फिल्म उनके लिए सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं है।
पहले के किरदारों से बिल्कुल अलग है कैरोल
विधात्री ने बताया कि कैरोल का लुक उनके अब तक निभाए गए किरदारों से काफी अलग है। फिल्म ‘जलसा’ में वह एक मलयाली पत्रकार के रूप में नजर आई थीं। उस किरदार के लिए उन्होंने बिना मेकअप, भारी लहजे और अलग हेयर लुक के साथ काम किया था। वहीं ‘द डिप्लोमैट’ में उन्होंने पंजाबी दूतावास अधिकारी की भूमिका निभाई, जिसमें उनका पहनावा काफी औपचारिक था। लेकिन कैरोल के किरदार में वह एक सामान्य मुंबई की लड़की के रूप में दिखाई देंगी। घुंघराले बाल, सहज लहजा और ज्यादा ग्लैमरस अंदाज उनके इस रूप को अलग बनाता है।
धीमी रही रफ्तार, लेकिन हर कदम आगे बढ़ा
विधात्री ने अपने करियर को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उनका सफर तेज गति से नहीं बढ़ा, बल्कि हर प्रोजेक्ट के साथ धीरे-धीरे आगे आया। ‘शिद्दत’ में छोटे रोल से शुरुआत करने के बाद ‘जलसा’ में महत्वपूर्ण भूमिका मिली। इसके बाद ‘द डिप्लोमैट’ में लीड भूमिका निभाई और अब ‘मैक्स, मिन और मियोज्स्की’ में वह प्रमुख किरदार में हैं। अभिनेत्री के लिए यह सफर भले धीमा रहा हो, लेकिन उन्हें लगता है कि वह लगातार सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उनका मानना है कि मंजिल तक पहुंचने से ज्यादा जरूरी है हर कदम का सही होना।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
