समंदर में तबाही : अमेरिका की बमबारी से ईरान के 30 जंगी जहाज तबाह, इसमें एक विशेष ड्रोन जहाज भी शामिल

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को लेकर अमेरिका की ओर से बड़ा दावा किया गया है। अमेरिकी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई में अब तक ईरान के 30 से अधिक जहाज डुबो दिए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद ईरान के मिसाइल हमलों में भी भारी गिरावट आई है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने शुक्रवार को बताया कि युद्ध की शुरुआत से अब तक अमेरिकी नौसेना ने ईरान के कई बड़े युद्धपोतों और छोटे जहाजों को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया है। इन जहाजों में एक विशेष ड्रोन जहाज भी शामिल था जिसका इस्तेमाल ईरान समुद्री निगरानी और हमलों के लिए कर रहा था। अमेरिकी सेना के मुताबिक यह जहाज हमले के बाद आग की लपटों में घिर गया और समुद्र में डूब गया।
ईरान की सैन्य गतिविधियों के लिए बेहद अहम थे जहाज
कूपर ने कहा कि ये जहाज ईरान की सैन्य गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण थे। इनके जरिए हथियारों की सप्लाई, समुद्री हमले और विभिन्न सैन्य ऑपरेशन किए जा रहे थे। अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई ने इन क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया है।
अमेरिकी सेना ने यह भी किया दावा
अमेरिकी सेना का यह भी दावा है कि युद्ध के पहले दिन ईरान ने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। लेकिन अब इन हमलों में लगभग 90 प्रतिशत की कमी आ गई है। कूपर के अनुसार इसका कारण यह है कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान के मिसाइल ठिकानों, लॉन्च साइट्स और सप्लाई नेटवर्क को लगातार निशाना बनाया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि समुद्री मार्गों पर नियंत्रण स्थापित होने से ईरान के लिए हथियार और मिसाइलों की नई सप्लाई लाना मुश्किल हो गया है। इससे उसकी हमले करने की क्षमता काफी कम हो गई है।
ईरान की हर गतिविधि पर नजर रख रही अमेरिकी सेनाः कूपर
एडमिरल ब्रैड कूपर ने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना ईरान की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रख रही है। उनका कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखना और ईरान के मिसाइल तथा परमाणु खतरे को कम करना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि युद्ध अभी समाप्त नहीं हुआ है और आगे भी सैन्य कार्रवाई जारी रह सकती है।
मध्य पूर्व में इस संघर्ष के कारण अभी भी तनाव बना हुआ है। हालांकि ईरान के हमलों में कमी आने से खाड़ी क्षेत्र में तेल आपूर्ति को लेकर कुछ राहत जरूर मिली है। अमेरिकी सेना का मानना है कि लगातार दबाव के कारण ईरान भविष्य में बातचीत के लिए मजबूर हो सकता है।
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