ट्रंप बैकफुट पर! : ईरान की शर्तों के आगे झुका अमेरिका, दो हफ्ते का सीजफायर बना मजबूरी

वाशिंगटन-तेहरान। मिडिल-ईस्ट में पिछले एक महीने से भड़की जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों से शुरू हुआ यह टकराव अब अस्थायी विराम की ओर बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक रुख बदलते हुए ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को दो हफ्तों के लिए रोकने का ऐलान कर दिया है।
यह फैसला उस समय आया जब ट्रंप द्वारा दी गई डेडलाइन खत्म होने ही वाली थी। पहले कड़ी चेतावनियों और हमलों की बात करने वाले ट्रंप अब कूटनीति की भाषा बोलते नजर आ रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि “मैं दो हफ्तों के लिए ईरान पर बमबारी रोकने पर सहमत हूं,” जिससे साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका फिलहाल टकराव से पीछे हट रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, यह बदलाव अचानक नहीं बल्कि पर्दे के पीछे हुई कूटनीतिक बातचीत का नतीजा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीपफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने ट्रंप से सीधे संपर्क कर हमले टालने की अपील की थी। इसके बाद ही यह सीजफायर संभव हो पाया।
दूसरी ओर, ईरान ने भी पाकिस्तान की पहल पर दो हफ्तों के युद्धविराम को मंजूरी दे दी है। हालांकि तेहरान ने साफ कर दिया है कि यह स्थायी शांति नहीं, बल्कि सिर्फ बातचीत का मौका है। ईरान ने 10 सूत्रीय प्रस्ताव रखते हुए अमेरिका से सभी प्रतिबंध हटाने, मुआवजा देने और जब्त संपत्तियां लौटाने की मांग की है।
अब 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच अहम वार्ता होने जा रही है। यह बैठक तय करेगी कि यह सीजफायर शांति में बदलेगा या फिर एक और बड़े टकराव की भूमिका बनेगा। फिलहाल, दुनिया की नजरें इसी बातचीत पर टिकी हैं।
ईरान की शर्तें
वहीं, ईरान ने शांति के लिए जो प्रस्ताव पेश किया है, उसमें कुछ ऐसी मांगें हैं जो अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती रही हैं. ईरान के मुताबिक, इन शर्तों पर अमल ही स्थायी समाधान का रास्ता है.
अमेरिका द्वारा हमला नहीं करने की गारंटी।
परमाणु कार्यक्रम में एनरिचमेंट की मंजूरी
होर्मुज पर नियंत्रणरू स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण बरकरार रहना और जहाजों से ट्रांजिट शुल्क वसूलना।
ईरान पर लगे सभी प्राथमिक और आर्थिक प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और जेएईए के सभी प्रस्तावों को खत्म करना।
युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए मुआवजा।
क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी।
लेबनान में इस्लामिक रेसिस्टेंस (हिज्बुल्लाह) के खिलाफ युद्ध खत्म करना।
ईरान ने अमेरिका के 15-सूत्रीय प्रस्ताव पर बातचीत की जताई इच्छा
ईरानी विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने घोषणा की है कि ईरान की सशस्त्र सेना दो हफ्ते के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित मार्ग प्रदान करेगी। ईरान ने अमेरिका के 15-सूत्रीय प्रस्ताव पर बातचीत की इच्छा जताई है। अराघची ने स्पष्ट किया कि समन्वय के साथ तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए कमर्शियल जहाजों को रास्ता दिया जाएगा। ईरान तभी शांत रहेगा, जब उस पर कोई हमला नहीं किया जाएगा।
लेबनान में कोई समझौता नहीं
उधर, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने सीजफायर का समर्थन किया, लेकिन स्पष्ट कर दिया कि यह समझौता लेबनान को शामिल नहीं करता। इजरायल हिजबुल्लाह के खिलाफ दक्षिण लेबनान में अपना अभियान जारी रखेगा। ईरान की मांग थी कि सीजफायर में लेबनान भी शामिल हो, लेकिन इजरायल ने इसे खारिज कर दिया।
इस्लामाबाद में होगी वार्ता
इस पूरे सीजफायर के पीछे पाकिस्तान की अहम भूमिका बताई जा रही है और इसी वजह से अमेरिका-ईरान की बातचीत के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को चुना गया है। शुक्रवार 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच आगे की वार्ता होगी।
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