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अमेरिका-ईरान समझौते से वित्तीय बाजारों को मिली ऊर्जा : एशियाई मार्केट बने रॉकेट, जापान से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक के सूचकांक पहुंचे शिखर पर

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Jun 15, 2026
05:02 AM
एशियाई मार्केट बने रॉकेट, जापान से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक के सूचकांक पहुंचे शिखर पर

अमेरिका और ईरान के बीच हुए बहुप्रतीक्षित शांति समझौते ने दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में नई ऊर्जा भर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा समझौते की घोषणा के तुरंत बाद एशियाई शेयर बाजारों में जोरदार तेजी देखने को मिली। निवेशकों ने इस समझौते का स्वागत करते हुए बड़े पैमाने पर खरीदारी की, जिससे जापान से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक प्रमुख सूचकांक नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए।

एशियाई बाजारों में रिकॉर्ड तेजी

समझौते की खबर के बाद जापान का निक्केई सूचकांक लगभग 4 प्रतिशत उछलकर इंट्राडे रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक भी 4.3 प्रतिशत की मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं ऑस्ट्रेलिया का एएसएक्स 200 इंडेक्स 125 अंकों की छलांग लगाकर 8,928 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।

अमेरिकी बाजारों से भी मिले सकारात्मक संकेत

एशियाई बाजारों के साथ-साथ अमेरिकी वायदा बाजारों में भी तेजी दर्ज की गई। एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में 0.8 प्रतिशत और नैस्डैक फ्यूचर्स में 1.4 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज फ्यूचर्स भी 0.8 प्रतिशत ऊपर कारोबार कर रहे थे। इन संकेतों से वॉल स्ट्रीट में मजबूत शुरुआत की उम्मीद जताई जा रही है।

ट्रंप ने किया बड़ा ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर शांति समझौते की घोषणा करते हुए कहा कि ईरान के साथ समझौता पूरा हो चुका है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने और अमेरिकी नौसैनिक अवरोध को तत्काल हटाने की अनुमति देने की बात कही। ट्रंप ने इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

ईरान ने भी समझौते पर लगाई मुहर

ईरान के कानून एवं उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भी समझौते की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच जल्द ही औपचारिक हस्ताक्षर हो सकते हैं। उनके अनुसार यह समझौता क्षेत्र में स्थिरता स्थापित करने और लंबे समय से जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम है।

तेल कीमतों में आई बड़ी नरमी

शांति समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने की खबर का सीधा असर तेल बाजार पर पड़ा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 3 डॉलर से अधिक गिरकर लगभग 84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी क्रूड भी करीब 81 डॉलर प्रति बैरल तक फिसल गया। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल आपूर्ति सामान्य होने से आने वाले समय में पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधन उत्पादों की कीमतों पर भी राहत का असर दिखाई दे सकता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह घटनाक्रम एक सकारात्मक और राहतभरा संकेत माना जा रहा है।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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