ट्रंप की ईरान को खुली धमकी: : समझौता करो या तबाही झेलो! संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राष्ट्रपति का कड़ा रुख, संयुक्त राष्ट्र महासभा में सख्त संदेश

संयुक्त राष्ट्र। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान ईरान के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने तेहरान को अमेरिका के साथ समझौता करने या गंभीर सैन्य कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी दी। ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास ऐसा समझौता करने का विकल्प है, जिससे वह दोबारा अपने देश का पुनर्निर्माण कर सके और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़े। इसके विपरीत, समझौते में विफलता की स्थिति में अमेरिका की ओर से और सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।
‘नष्ट कर दूं या समझौते का रास्ता चुनो’
ट्रंप ने अपने संबोधन में ईरान के सामने बेहद कठोर विकल्प रखा। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या इस्लामी गणराज्य को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाए, ताकि वह भविष्य में दूसरे देशों और लोगों को नुकसान न पहुंचा सके। उन्होंने ईरान को ऐसे हालात में धकेलने की बात भी कही, जहां उसके लिए बचने और भविष्य की उम्मीदें खत्म हो जाएं।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान समझौते के लिए तैयार हो सकता है। उन्होंने कहा कि चुनाव के तुरंत बाद समझौता होने की संभावना है, क्योंकि उनके अनुसार ईरान के पास ऐसा न करने का कोई तर्कसंगत कारण नहीं है।
ईरान पर चौतरफा दबाव बनाने की अपील
ट्रंप ने दूसरे देशों से ईरान का पूर्ण आर्थिक अलगाव लागू करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब तक तेहरान वाणिज्यिक जहाजों पर हमले बंद नहीं करता, परमाणु महत्वाकांक्षाओं को त्यागने की दिशा में कदम नहीं उठाता और आतंकवाद के समर्थन से पीछे नहीं हटता, तब तक उस पर दबाव जारी रहना चाहिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान मध्यावधि चुनावों में उनके प्रदर्शन का इंतजार कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह स्वयं चुनाव में उम्मीदवार नहीं हैं, लेकिन रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए प्रचार करेंगे। ट्रंप ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि उनकी नीति का एक प्रमुख उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है।
युद्धविराम उल्लंघन का आरोप, सैन्य अभियान का दावा
ट्रंप ने ईरान पर परमाणु वार्ता के लिए परिस्थितियां बनाने के उद्देश्य से किए गए युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की निंदा करने वाले प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का आभार जताया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के दौरान ईरान की नौसेना, वायु सेना, रडार प्रणालियों और मिसाइल तथा ड्रोन निर्माण क्षमता के बड़े हिस्से को नष्ट कर दिया गया है। ये दावे उनके संबोधन में किए गए, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए अलग से सत्यापन आवश्यक है।
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