सोमवार, 13 अप्रैल 202608:43:29 PM
Download App
Home/विदेश

अंतरिक्ष में जीवन का सहारा : ईसीएलएसएस का कमाल, आईएसएस पर कैसे जिंदा रहते हैं एस्ट्रोनॉट्स जानें

admin

admin

Apr 13, 2026
08:31 AM
ईसीएलएसएस का कमाल,  आईएसएस पर कैसे जिंदा रहते हैं एस्ट्रोनॉट्स जानें

जब अंतरिक्ष यात्री नासा के अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर रहते हैं, तो वहां पृथ्वी की तरह हवा और पानी की नई सप्लाई संभव नहीं होती। ऐसे कठिन माहौल में “एनवायरनमेंटल कंट्रोल एंड लाइफ सपोर्ट सिस्टम” यानी ईसीएलएसएस उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी सुरक्षा ढाल बन जाता है। यह उन्नत प्रणाली अंतरिक्ष में पृथ्वी जैसा वातावरण तैयार करती है।

पानी की एक-एक बूंद कीमती

आईएसएस पर हर अंतरिक्ष यात्री को रोजाना लगभग एक गैलन पानी की जरूरत होती है। ईसीएलएसएस का वाटर रिकवरी सिस्टम इस चुनौती को हल करता है। यह सिस्टम मूत्र, पसीने से बनी नमी और स्पेस सूट के अंदर जमा पानी को इकट्ठा करता है। इसके बाद मल्टी-फिल्ट्रेशन और केमिकल प्रोसेस के जरिए पानी को शुद्ध किया जाता है। खास सेंसर इसकी गुणवत्ता जांचते हैं। यदि पानी पूरी तरह साफ नहीं होता, तो उसे दोबारा प्रोसेस किया जाता है। इस तकनीक की मदद से लगभग 90% पानी फिर से इस्तेमाल योग्य बन जाता है।

हवा को सांस लेने लायक बनाना

अंतरिक्ष स्टेशन के अंदर की हवा को शुद्ध रखना भी उतना ही जरूरी है। एयर रिवाइटलाइजेशन सिस्टम जहरीली गैसों, गंध और सूक्ष्म कणों को हटाता है। सबसे अहम काम कार्बन डाइऑक्साइड को निकालना है, जो इंसान के सांस लेने से पैदा होती है। इसके लिए एक्टिव चारकोल, केमिकल फिल्टर और खास “मॉलिक्यूलर सिव” तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे हवा लगातार साफ बनी रहती है।

ऑक्सीजन कैसे बनती है अंतरिक्ष में?

ईसीएलएसएस का ऑक्सीजन जनरेशन सिस्टम पानी को इलेक्ट्रोलाइसिस प्रक्रिया से तोड़कर ऑक्सीजन और हाइड्रोजन बनाता है। ऑक्सीजन को केबिन में छोड़ दिया जाता है ताकि एस्ट्रोनॉट्स सांस ले सकें। वहीं हाइड्रोजन का इस्तेमाल एक खास प्रक्रिया (सबाटियर रिएक्टर) में कार्बन डाइऑक्साइड के साथ मिलाकर फिर से पानी बनाने में किया जाता है। इस तरह संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होता है।

पृथ्वी जैसा माहौल बनाए रखने की तकनीक

ईसीएलएसएस सिर्फ हवा और पानी तक सीमित नहीं है। यह तापमान, नमी, वायुदाब और वेंटिलेशन को भी नियंत्रित करता है। साथ ही आग लगने की स्थिति में पहचान और नियंत्रण की व्यवस्था भी इसमें शामिल है। नासा मार्शल स्पेस फ़्लाइट सेंटरने इस सिस्टम के विकास और परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ईसीएलएसएस आज आईएसएस पर जीवन को संभव बनाता है और भविष्य के चंद्रमा व मंगल मिशनों के लिए भी आधार तैयार कर रहा है।

admin
Written By

admin

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

आपको यह खबर कैसी लगी? शेयर करें

अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें