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गुप्त नवरात्रि : धार्मिक नगरी में दिखा आस्था-श्रद्धा ओर भक्ति का अनुपम संगम, भस्मारती में उमड़ी भक्तों की भीड़, चंद्रमा-बिंदी शृंगार में भगवान ने दिए दिव्य दर्शन

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 15, 2026
06:50 AM
धार्मिक नगरी में दिखा आस्था-श्रद्धा ओर भक्ति का अनुपम संगम, भस्मारती में उमड़ी भक्तों की भीड़, चंद्रमा-बिंदी शृंगार में भगवान ने दिए दिव्य दर्शन

उज्जैन। गुप्त नवरात्र के प्रथम दिन श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। आषाढ़ शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के पावन अवसर पर विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का विशेष चंद्रमा और बिंदी से मनोहारी शृंगार किया गया। बाबा के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। जैसे ही गर्भगृह के पट खुले और भक्तों को बाबा महाकाल के दर्शन हुए, पूरा परिसर ष्जय श्री महाकालष् के गगनभेदी जयघोष से गुंजायमान हो उठा।

वीरभद्र की आज्ञा के बाद खुले मंदिर के कपाट

ब्रह्ममुहूर्त में परंपरा के अनुसार सबसे पहले भगवान वीरभद्र की आज्ञा ली गई। इसके बाद ढोल-नगाड़ों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्री महाकालेश्वर मंदिर के कपाट खोले गए। पुजारियों ने भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया। पूजन-अर्चन के पश्चात गुप्त नवरात्र के पहले दिन विशेष रूप से बाबा का चंद्रमा और बिंदी से आकर्षक शृंगार किया गया, जिसने भक्तों का मन मोह लिया।

भस्म आरती ने बढ़ाई आध्यात्मिक आभा

दिव्य शृंगार के बाद विधि-विधान से विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती संपन्न हुई। आरती के दौरान मंदिर परिसर घंटियों की मधुर ध्वनि, शंखनाद और वैदिक मंत्रों से गूंज उठा। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर बाबा महाकाल के दर्शन करते रहे और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। महाआरती के बाद भक्तों ने भगवान का आशीर्वाद प्राप्त कर परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।

औषधीय भस्म से होती है आरती, परंपराओं का रखा जाता है विशेष ध्यान

मंदिर प्रशासन के अनुसार, पहले भस्म आरती में श्मशान की राख का उपयोग किया जाता था, लेकिन वर्तमान में कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार पवित्र भस्म अर्पित की जाती है। भस्म आरती में शामिल होने वाले पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है, ताकि प्राचीन धार्मिक परंपराओं का पूर्ण पालन हो सके।

देश-विदेश से पहुंचते हैं श्रद्धालु

श्री महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती विश्वभर में प्रसिद्ध है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु और कई विशिष्ट हस्तियां बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचती हैं। गुप्त नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए, जिससे श्रद्धालुओं को सहज और सुरक्षित दर्शन का लाभ मिल सके।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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