हमने असंभव कार्य को किया संभव : देश की सबसे लंबी टनल का मुआयना कर बोले सीएम, नर्मदा जल से बदलेगी विंध्य-बुंदेलखंड की तस्वीर

कटनी से दीपा श्रीवास्तव की रिपोर्ट
महाकौशल से विंध्य और बुंदेलखंड तक नर्मदा का जल पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजनाका सपना अब साकार होने की दहलीज पर पहुंच गया है। करीब 17 वर्षों से जिस परियोजना का इंतजार किया जा रहा था, उसका सबसे अहम हिस्सा मानी जाने वाली देश की सबसे लंबी 11.952 किलोमीटर जल सुरंग ‘स्लीमनाबाद टनल’ अब निर्माण के अंतिम चरण में पहुंच गई है। इस ऐतिहासिक परियोजना का निरीक्षण करने शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कटनी जिले के स्लीमनाबाद पहुंचे और निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया।
वर्ष 2008 में शुरू हुई इस परियोजना को भू-गर्भीय चुनौतियों के कारण अत्याधुनिक तकनीक और विशेष इंजीनियरिंग उपायों से अंतिम चरण तक पहुंचाया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को सुरंग निर्माण की वर्तमान स्थिति, तकनीकी विशेषताओं और शेष कार्यों की जानकारी दी। इस दौरान सीएम ने कहा कि हमने असंभव कार्य को संभव किया है 2023 में जहाँ सबने हार मान ली थी की यह प्रोजेक्ट अब पूरा नहीं हो पाएगा लेकिन उसके बाद हमने हिम्मत के साथ सभी चुनौतियों का सामना किया।

मुख्यमंत्री ने परियोजना को समयसीमा में पूरा करने के निर्देश देते हुए कहा कि यह केवल एक सिंचाई परियोजना नहीं, बल्कि लाखों किसानों और ग्रामीण परिवारों के भविष्य से जुड़ा विकास अभियान है। उन्होंने अधिकारियों से गुणवत्ता और सुरक्षा के सभी मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को भी कहा।
नर्मदा का जल पहुंचने से बदलेगी हजारों किसानों की तकदीर
स्लीमनाबाद टनल नर्मदा घाटी विकास परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके पूरा होने के बाद नर्मदा का पानी उन क्षेत्रों तक पहुंचेगा, जहां वर्षों से सिंचाई और पेयजल की समस्या बनी हुई है। विंध्य और बुंदेलखंड के कई जिलों में खेती को नया आधार मिलेगा, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। साथ ही जल संकट से जूझ रहे अनेक गांवों को भी स्थायी राहत मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।
मुख्यमंत्री के स्वागत में किसानों ने बरसाए फूल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्लीमनाबाद पहुंचने पर बड़ी संख्या में किसान और स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे। लोगों ने फूलों की वर्षा कर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और नर्मदा परियोजना को क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। किसानों ने कहा कि इस योजना के पूरा होने से उनकी वर्षों पुरानी पानी की समस्या दूर होगी और खेती को नई मजबूती मिलेगी।
राज्य सरकार का मानना है कि यह परियोजना केवल जल उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि महाकौशल, विंध्य और बुंदेलखंड के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई गति देगी। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यह सुरंग देश की सबसे लंबी जल सुरंग के रूप में एक नई इंजीनियरिंग उपलब्धि भी दर्ज करेगी।
2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की इस महत्वाकांक्षी परियोजना पूरी होने पर जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना के लगभग 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी।
17 वर्षों की कठिन भू-गर्भीय चुनौती खत्म
अंतिम चरण में पहुंची 11.952 किमी लंबी सुरंग
नर्मदा का जल गुरुत्वाकर्षण से विंध्य के खेतों तक पहुंचेगा
2.45 लाख हैक्टेयर भूमि में स्थायी रूप से सिंचाई हो सकेगी।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
