शोहरत से पहले अमिताभ ने झेला तिरस्कार : बिग बी ने सुनाया संघर्ष के दिनों का किस्सा, कहा गया था बहुत लंबे हो घर जाओ

मुंबई। आज सदी के महानायक के रूप में पहचाने जाने वाले अमिताभ बच्चन के लिए फिल्मी दुनिया में अपनी जगह बनाना कभी आसान नहीं था। अपने लंबे अभिनय सफर में उन्होंने शोहरत के साथ संघर्ष और अस्वीकृति का दौर भी देखा। हाल ही में ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के 18वें सीजन के विशेष कार्यक्रम में उन्होंने अपने शुरुआती दिनों की ऐसी ही यादें साझा कीं।
‘तुम्हें अभिनय आता ही नहीं’
सामान्य तौर पर कलाकारों और खिलाड़ियों के संघर्ष की तुलना करते हुए एक प्रतिभागी ने अमिताभ बच्चन से पूछा कि क्या कलाकारों को भी काम के दौरान निर्देशकों की डांट सुननी पड़ती है। इस पर अमिताभ ने अपने शुरुआती दिनों को याद किया।
उन्होंने बताया कि उस दौर में उन्हें अक्सर कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ता था। लोगों की ओर से यहां तक कहा जाता था कि उन्हें अभिनय नहीं आता और वह बहुत लंबे हैं, इसलिए उन्हें अपने घर लौट जाना चाहिए। महानायक के मुताबिक, ये टिप्पणियां उनके संघर्ष के दिनों का हिस्सा थीं। हालांकि उन्होंने आलोचनाओं को अपने रास्ते की दीवार नहीं बनने दिया और लगातार काम की तलाश में जुटे रहे।
एक बार देर से पहुंचे तो फिल्म से निकाल दिया
अमिताभ ने यह भी बताया कि काम मिलने के बाद भी मुश्किलें खत्म नहीं हुईं। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक बार वह फिल्म के सेट पर पहुंचने में देर से हो गए थे। उनके मुताबिक, उस समय उनके पास अपनी गाड़ी नहीं थी और वह किसी दूसरे की गाड़ी से सेट पर पहुंचे। वहां निर्देशक पहले से बाहर खड़े थे। अमिताभ के पहुंचते ही निर्देशक ने उन्हें फिल्म से निकाल दिया। यह किस्सा बताता है कि जिस कलाकार को आज अनुशासन और पेशेवर प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है, उसे भी शुरुआती दौर में कड़े फैसलों का सामना करना पड़ा था।
आवाज से शुरू हुआ था सिनेमा का सफर
अमिताभ बच्चन पांच दशक से अधिक समय से भारतीय सिनेमा का हिस्सा हैं। अभिनय की दुनिया में पूरी तरह स्थापित होने से पहले उन्होंने आवाज देने वाले कलाकार के रूप में भी काम किया था। वर्ष 1969 में उन्होंने मृणाल सेन की फिल्म ‘भुवन शोम’ में अपनी दमदार आवाज दी थी। आगे चलकर यही आवाज, अभिनय और व्यक्तित्व उनकी सबसे बड़ी पहचान बने।
आज करोड़ों प्रशंसकों के दिलों पर राज करने वाले अमिताभ बच्चन की कहानी यही बताती है कि अस्वीकृति अंत नहीं, बल्कि बड़ी सफलता की शुरुआत भी हो सकती है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
