मेघायल में बड़ा हुआ भाजपा का कुनबा : यूडीपी के 8 विधायकों ने ज्वाइन की पार्टी, कोयला खनन और खासी भाषा को लेकर मिले आश्वासन के बाद बदला पाला

नई दिल्ली। मेघालय की राजनीति से जुड़ी खबर सामने आई है। यहां पर यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के 8 विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया है। आठ विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद यूडीपी की संख्या 12 से घटकर चार और भाजपा की संख्या दो से बढ़कर 10 हो गई है। यूडीपी के भी विधायकों ने दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ली। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा, प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी अनिल एंटनी समेत कई नेता मौजूद रहे।
इन विधायकों ने ली भाजपा की सदस्यता
यूडीपी का साथ छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले विधायकों में लहकमेन रिंबुई, पियुस मारवीन, किर्मेन शायला, मेयरलबोर्न सिएम, मैथ्यू कुरबाह, ओलान सिंह सुइन, बालाजिएड कुपार सिनरेम और सिनशार लिंगदोह थाबाह शामिल हैं। भाजपा में शामिल हुए आठों विधायकों का स्वागत करते हुए किरे रिजीजू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान पूर्वोत्तर और मेघालय में विकास के क्षेत्र में बदलाव हुए हैं। रिजिजू के मुताबिक, प्रधानमंत्री का पूर्वोत्तर के लोगों के साथ जुड़ाव और विकास की राजनीति इन विधायकों के भाजपा में आने के प्रमुख कारणों में शामिल है।
कोयला खनन और खासी भाषा को लेकर मिला आश्वासन
विधायकों के भाजपा में शामिल होने से पहले केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनकी मांगों पर बातचीत हुई थी। इनमें कोयला खनन से जुड़े नियमों में बदलाव, खासी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना और मेघालय रेजिडेंट्स सेफ्टी एंड सिक्योरिटी एक्ट लागू करने की मांग प्रमुख थी। विधायकों ने 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले इन मुद्दों पर कार्रवाई का आश्वासन मांगा था।
यूडीपी के सामने नई चुनौती, भाजपा का बढ़ा विधानसभा आधार
मेघालय विधानसभा में कुल 60 सीटें हैं। आठ विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद न्क्च् की संख्या 12 से घटकर चार और भाजपा की संख्या दो से बढ़कर 10 हो गई है। नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) 33 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है। इस बदलाव से मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर दलों की स्थिति में बदलाव आया है।
यह घटनाक्रम 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले मेघालय की राजनीति में महत्वपूर्ण संगठनात्मक बदलाव के रूप में सामने आया है। इसके आगे के राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव संबंधित दलों के फैसलों और गठबंधन की गतिविधियों पर निर्भर करेंगे।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
