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सनसनी लाएं, लेकिन सत्य और साहस भी दिखाएं : अभ्युदय-2026 कार्यक्रम से सीएम मोहन ने मीडिया से की अपील, रामायण और नारद का दिया उदाहरण

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 18, 2026
09:57 AM
अभ्युदय-2026 कार्यक्रम से सीएम मोहन ने मीडिया से की अपील, रामायण और नारद का दिया उदाहरण

भोपाल। मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने मंगलवार को राजधानी भोपाल के माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के तीन दिवसीय ‘अभ्युदय-2026’ का शुभारभं किया। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर लगाई गई ‘100 साल से 100 सुर्खियां’ प्रदर्शनी का अवलोकन किया। साथ विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि 36 वर्षों में संस्थान ने अपनी अलग साख और पहचान बनाई है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम ने पत्रकारिता की भूमिका पर भी सवाल उठाए। इतना ही नहीं, पत्रकारों से फेक न्यूज से दूर रहने और सत्य के साथ साहसपूर्वक खबरें सामने रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज के पत्रकार को ‘फेक न्यूज’ की जगह ‘नेक न्यूज’ की आदत डालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकार सत्ता के विरोधी हो सकते हैं, लेकिन देशहित को हमेशा सर्वोपरि रखना चाहिए।

‘सनसनी लाएं, लेकिन सत्य भी लाएं’

मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकारिता में सनसनी हो सकती है, लेकिन उसके साथ सत्य और साहस भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मीडिया लोकतंत्र में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आज सोशल मीडिया के साथ प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया भी जनमत निर्माण का बड़ा माध्यम हैं।

रामायण से लेकर नारद तक का दिया उदाहरण

सीएम मोहन यादव ने पत्रकारिता के इतिहास को प्राचीन परंपराओं से जोड़ते हुए भगवान राम और महर्षि वाल्मीकि का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि राम के पुत्रों तक उनकी पहचान और संदेश पहुंचाने में रामायण के माध्यम से जनसंचार जैसी भूमिका दिखाई देती है। इसी तरह उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के समय की भविष्यवाणी और नारद की भूमिका का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर में भी सूचनाओं के प्रसार का अपना माध्यम रहा होगा।

सावरकर और आपातकाल का किया जिक्र

मुख्यमंत्री ने वीर सावरकर के पत्रकारिता संबंधी योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने 1857 के संघर्ष को स्वतंत्रता संग्राम के रूप में प्रस्तुत करने का साहस दिखाया। उन्होंने कहा कि सावरकर ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी वैचारिक लड़ाई जारी रखी।

सीएम ने आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में समाचार पत्रों ने अपने पहले पन्ने खाली रखकर भी विरोध का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की यही निर्भीकता लोकतंत्र की ताकत है और आज भी मीडिया को सत्य, साहस और देशहित के साथ अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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